भारत और नेपाल को जोड़ने वाले झूलापुल में दिसंबर में किया गया डामर जनवरी में उखड़ने लगा है। पुल पर मरम्मत और डामरीकरण का काम हर तीसरे वर्ष किया जाता है। इस बार सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत पुल की मरम्मत के लिए पांच लाख रुपये मिले थे। क्षेत्र के लोग हर तीसरे साल डामर बिछाने के बजाए पुल पर एल्युमिनियम की प्लेट लगाने की मांग उठा रहे थे लेकिन धन की कमी के कारण ऐसा नहीं किया गया। बताया गया है कि पुल पर डामर बिछाने का काम रात के समय कम तापमान में किया गया। इस कारण एक दो स्थानों पर यह उखड़ गया है।
महाकाली पर बने इस झूलापुल से पूरे दिन लोगों की आवाजाही होती है। शाम को छह बजे पुल बंद होने के बाद इसमें डामर बिछाने का काम किया गया। कम तापमान में बिछाया गया डामर सही तरीके से सेट नहीं हो पाया। इस कारण वह उखड़ने लगा है। इसे लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। पुल की मरम्मत का काम करने वाले ठेकेदार मुरलीधर भट्ट ने स्वीकार किया कि दो स्थानों पर डामर उखड़ा है। अब मार्च में तापमान बढ़ते ही फिर से डामर किया जाएगा। दिसंबर की रात में कम तापमान में यह डामर किया गया था। क्योंकि काम को समय पर पूरा किया जाना था। वह कहते हैं कि जिन स्थानों पर डामर उखड़ा है वहां पर फिर से किया जाएगा। ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की दिक्कत न हो।