पिथौरागढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद छह महीने से चल रही है। जब नगर को स्मार्ट सिटी बनाने का विचार सामने आया तब प्रशासन ने अपनी ओर से कुछ प्रस्ताव तैयार किए थे, इनमें एक प्रस्ताव नगर क्षेत्र की बिजली लाइन को अंडरग्राउंड करने का प्रस्ताव बनाया गया। हालांकि यह काम काफी जटिल है, लेकिन स्मार्ट सिटी बनाने के लिए इस जटिलता को पार करना होगा। इसके अलावा कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था भी अंडरग्राउंड करने का प्रस्ताव है।
स्मार्ट सिटी के प्रस्तावों को तैयार कर रहे एसडीएम अनुराग आर्य ने बताया कि बिजली की लाइन अंडरग्राउंड होने पर सड़कों के किनारे यातायात में बाधक बने बिजली के पोल खुद ही हट जाएंगे। इसी तरह कूड़ा निस्तारण के लिए अंडरग्राउंड पिट तैयार होंगे। पालिका को कूड़ा निस्तारण के लिए वाहनों को नगर से दूर नहीं ले जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि नगर में संचार की सुविधा काफी हद तक बेहतर हो गई है। वाई-फाई सेवा शुरू होने से लोगों को काफी मदद मिली है। वाई-फाई सेवा को और अपग्रेड किया जाएगा। सीवरेज सिस्टम के लिए शासन से अब पैसा आ गया है।
ट्रैफिक प्लान को दुरुस्त करने के लिए तीन नए स्थानों पर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव है। ऐंचोली के पास से बन रही बाईपास रोड का निर्माण जल्दी पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए शासन स्तर पर जो नए फैसले लिए गए हैं उसकी जानकारी अभी नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन ने अपनी ओर से प्रारंभिक तैयारियां कर ली हैं।
स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव से सभी खुश
सोरघाटी के इस खूबसूरत नगर को स्मार्ट सिटी का दर्जा देने के प्रस्ताव से सभी खुश हैं। कई लोग फेसबुक और सोशल मीडिया में इसके लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस नगर में सुधार के लिए थोड़े से प्रयास की जरूरत है।
सरकार का फैसला स्वागत योग्य
खड़कोट निवासी दीपा भट्ट का कहना है कि एक अच्छे सुविधासंपन्न शहर में रहने की तमन्ना हर किसी की होती है। सरकार का फैसला स्वागत योग्य है और प्रशासन को चाहिए कि स्मार्ट सिटी के मानक के हिसाब से तेजी से काम शुरू करे। नगर का हर व्यक्ति इसमें पूरा सहयोग करेगा।
स्मार्ट के लिए ज्यादा मेहनत नहीं
नगर निवासी ललिता बोहरा का कहना है कि पिथौरागढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं है। नगर का ट्रैफिक प्लान सही हो जाए और पानी, बिजली, सफाई की व्यवस्था सुधर जाए तो यह स्मार्ट सिटी का रूप ले लेगा। वह कहती हैं कि अब प्रशासन की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।
नागरिक चेतना का भी विकास जरूरी
खड़कोट निवासी लता बोरा कहती हैं कि यदि प्रशासन तेजी से काम करे तो अपना शहर एक साल के भीतर स्मार्ट सिटी का ताज पहन लेगा। स्मार्ट सिटी में लोगों को नागरिक चेतना का भी विकास करना होगा। सफाई के प्रति सभी लोग जागरूक रहें और अन्य लोगों को भी प्रेरित करने का काम करें।
मास्टर प्लान लागू होता तो अच्छा होता
नगर निवासी गीता खड़ायत का कहना है कि यदि शहर के बसते समय मास्टर प्लान के नियम सख्ती से लागू किए होते तो आज ज्यादा मेहनत की जरूरत ही नहीं पड़ती। मास्टर प्लान लागू होने पर एक व्यवस्थित शहर बन जाता। अब इन कमियों को दूर करना होगा और जल्दी से स्मार्ट सिटी बनाई जाए।
स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को लटकाएं नहीं
नगर निवासी ललिता बिष्ट का कहना है कि सरकार ने यदि फैसला ले लिया है तो उसे लागू कराने का भी प्रयास करे। अन्य सरकारी योजनाओं की तरह स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को लटकाया नहीं जाना चाहिए। बेहतर सुविधा की चाह सभी को रहती है और इसमें सभी लोग सहयोग के लिए आगे भी आएंगे।