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धरमघर में सार्वजनिक भूमि में बने मकान को प्रशासन ने ध्वस्त किया

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धरमघर में अवैध रूप से बने मकान को तोड़ने के लिए लगाए गए मजदूर। अमर उजाला - फोटो : PITHORAGARH
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सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए भवन को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है। कार्रवाई में कोई बाधा न पहुंचे इसके लिए छह राजस्व उपनिरीक्षक और पीआरडी के जवान मौके पर मौजूद रहे। नोटिस के बावजूद अवैध निर्माण को नहीं हटाने पर ध्वस्तीकरण में आने वाला पूरा खर्चा निर्माणकर्ता से वसूला जाएगा।
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धरमघर के नागिलागांव निवासी नंदन सिंह ने 2007 में सरकारी भूमि में भवन बनाया था। शिकायत मिलने पर प्रशासन ने निर्माणकर्ता को नोटिस जारी किया था। बाद में यह मामला न्यायालय में चला। 2011 में अवर न्यायालय विहित प्राधिकारी बेड़ीनाग ने धारा 4/5 उप्र सार्वजनिक भू ग्रहादि अधिनियम 1972 के तहत भवन ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इस आदेश पर प्रशासन ने 27 मई 2019 को मजदूरों को लगाकर अतिक्रमित भवन को तोड़कर खुर्दबुर्द किया था।
साथ ही निर्माणकर्ता को बाकी का अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद निर्माणकर्ता के अतिक्रमण नहीं हटाने पर नायब तहसीलदार पूरन गिरी गोस्वामी की ओर से 17 दिसंबर को नोटिस जारी करने के बाद 18 दिसंबर की सुबह अवैध रूप से बनाए गए भवन को तोड़ दिया गया। भवन ध्वस्त करने के लिए बड़ी संख्या में मजदूर लगाए गए। राजस्व उपनिरीक्षक त्रिवेंद्र कुमार, संजय रावत, मनीषा बिष्ट, कविता प्रिया, प्रीति चंद मौजूद रहे।
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अतिक्रमण के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पीआरडी जवान तैनात किए गए थे। इधर नायब तहसीलदार ने बताया कि नोटिस जारी करने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर अब ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में जो भी खर्च आया है उसकी पूरी वसूली निर्माण कर्ता से वसूली जाएगी।
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