थल में स्थित पौराणिक बालेश्वर मंदिर। संवाद
थल (पिथौरागढ़)। थल में रामगंगा नदी किनारे 12 वीं सदी में निर्मित पौराणिक बालेश्वर महादेव का मंदिर बरसात में टपकने लगा है। मंदिर की छत और दीवारों से पानी रिसाव होने से पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही मंदिर के पुजारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बालेश्वर महादेव मंदिर का विशेष महत्व है। इस मंदिर में विभिन्न पर्वों के साथ ही सावन में हजारों लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सदियों पुराना होने से बरसात में मंदिर के गर्भ गृह और मुख भाग के भीतर स्थित चारों ओर दीवारों और खंभों से पानी टपकने लगा है। इस समय सावन का पवित्र माह चल रहा है। मंदिर में सोमवार के दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती हैं।
बालेश्वर महादेव मंदिर पुजारी समिति के अध्यक्ष गणेश दत्त भट्ट का कहना है कि मंदिर के अंदर पानी जमा हो जाता है। ऐसे में मंदिर के भीतर की गीली दीवार और खंभे गिरने का भय लगा रहता है। पुरातत्व विभाग के अधीन इस मंदिर में दो साल पहले राज्य सरकार की ओर से मंदिर के सौंदर्यीकरण और सुधारीकरण के लिए पहली किस्त 75 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं लेकिन अभी कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस पर मंदिर समिति में नाराजगी है। उन्होंने पुरातत्व विभाग से मंदिर का शीघ्र सुधार किए जाने की मांग की है।