रातीगाड़ में सड़क बंद होने से लोगों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ी
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रातीगाड़ में भूस्खलन से बंद हुए थल-मुनस्यारी मार्ग को खोलने में लोनिवि को दूसरे दिन कामयाबी मिली। इससे सड़क के दोनों ओर फंसे वाहन आर-पार हुए। अलबत्ता अपरान्ह 3.10 बजे फिर से मलबा गिरने से सड़क बाधित हो गई। लोनिवि की जेसीबी सड़क से मलबा हटाने में जुटी है।
रविवार रात बारिश के दौरान रातीगाड़ के पास भारी मात्रा में भूस्खलन हो गया था। सोमवार को लोनिवि की दो जेसीबी मलबा हटाने में जुटी रही, लेकिन सड़क नहीं खुल पाई। मंगलवार को भी सुबह से ही मलबा हटाने का कार्य शुरू हो गया। दोपहर दो बजे मलबा साफ कर सड़क को खोल दिया गया। इस दौरान थल और मुनस्यारी जाने वाले करीब पांच दर्जन वाहन आसानी से गंतव्य का रवाना हो गए। इसके बाद अपरान्ह 3.10 बजे फिर से भूस्खलन होने से सड़क बंद हो गई। जेसीबी के चालक भोजन करने को नाचनी गए थे। सड़क बंद होने की सूचना पर लोनिवि के जेई योगेश चौबे मौके पर पहुंचे और उन्होंने जेसीबी ऑपरेटरों को मौके पर बुलाया।
बोरागांव की पहाड़ी से लगातार हो रहे भूस्खलन से यातायात पूरी तरह बंद हो जा रहा है। लोगों को पहाड़ी पर करीब ढाई किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है। रातीगाड़ पर 30 मीटर नीचे रामगंगा से पहाड़ी की ओर लगातार कटाव हो रहा है। पहाड़ी के ऊपर से भूस्खलन और नीचे से नदी के कटाव से समस्या बनी है।
पिछले छह वर्षों से लगातार हो रहा कटाव
नाचनी। रातीगाड़ में पिछले वर्ष 2013 की आपदा से ही कटाव हो रहा है। तब रामगंगा ने अपना प्रवाह बदलकर पहाड़ी की ओर कर लिया था। सड़क के नीचे पहाड़ी के कटाव को रोकने के लिए चेकडैम बनाए, लेकिन उफनाई नदी उन्हें भी बहा ले गई। यदि रामगंगा के वर्तमान प्रवाह को उसके मूल प्रवाह में डालने की कोशिश की जाए तो समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। रातीगाड़ से लगे भैंसखाल ग्राम में नदी के चैनलाइज का कार्य सफल रहा है। इससे ग्रामीणों और वन पंचायत की जमीनों को भी नदी की भेंट चढ़ने से रोका जा सकता है।
शासन में अटका 56 करोड़ का प्रस्ताव
नाचनी। भैंसखाल के ग्रामीणों ने अपनी और वन पंचायत की जमीनों को बचाने के लिए पूर्व में प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई थी। इस पर सिंचाई विभाग ने वर्ष 2016 में हरड़िया से रातीगाड़ का सर्वे किया। सिंचाई खंड धारचूला ने करीब दो किमी क्षेत्र में रामगंगा के किनारे तटबंध बनाने के लिए 56 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा, लेकिन इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिशासी अभियंता पीके दीक्षित ने बताया कि यदि उक्त प्रस्ताव की स्वीकृति मिल जाती तो समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाता।