टनकपुर (चंपावत)। खटीमा हाईवे पर बिचई के पास शनिवार सुबह टैक्सी और ट्रैक्टर की भीषण टक्कर में टैक्सी चालक हरीश कुमार (34) की इलाज के दौरान मौत हो गई। ट्रैक्टर में सवार एक दंपती भी घायल हो गया।
टक्कर के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने गंभीर रूप से घायल हरीश कुमार को उप जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉ. नौनिहाल सिंह ने बताया कि सिर में गंभीर चोट लगने के कारण हरीश ने दम तोड़ दिया। मृतक हरीश कुमार पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट तहसील के वुड काफल निवासी थे। एसएसआई पूरन सिंह तोमर ने बताया कि यह हादसा बिचई सेल कर कार्यालय के पास सुबह करीब छह बजे हुआ। टैक्सी बनबसा से टनकपुर जा रही थी और ट्रैक्टर टनकपुर से बनबसा की ओर आ रहा था। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया है।
हादसे में ट्रैक्टर सवार मूल रूप से पीलीभीत के जहानाबाद और हाल निवासी मनिहार गोठ दया राम(55), उसकी पत्नी रामवती (50) छिटककर नीचे गिर कर चोटिल हो गए। दोनों का भी प्राथमिक इलाज किया गया। बंटाईदार दंपती ने बताया कि उनका पुत्र राम प्रकाश ट्रैक्टर चला रहा था, उसे चोट नहीं आई है। उनके परिवार ने बनबसा में बंटाई में खेत लिया है और धान रोपाई लगाने के लिए सुबह जा रहे थे।
वहीं पुलिस ने मृतक टैक्सी चालक के परिजनों को सूचना दी। एसआई भूपेंद्र सिंह ने पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा। सूचना मिलते ही टैक्सी चालक के चकरपुर,रुद्रपुर से शोकाकुल रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे। बताया कि वह डीडीहाट के लिए जा रहा था, टनकपुर से सवारी भरनी थी। शुक्रवार की शाम को ही वह डीडीहाट से बनबसा सवारी लेकर आया था।
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पांच दिन पहले ही खरीदी थी टैक्सी, दो मासूम पुत्रियों के सिर से उठा पिता का साया
टनकपुर (चंपावत)। मृतक टैक्सी चालक हरीश कुमार ने पांच दिन पहले ही नई टैक्सी खरीदी थी। उसके परिवार में पत्नी अनीता, पुत्री पांच वर्षीय शैलजा, तीन वर्षीय अनीता है। दो मासूम पुत्रियों के सिर से पिता का साया उठ गया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर शोकाकुल रिश्तेदारों का जमावड़ा लगा रहा। मृतक के ससुर रुद्रपुर निवासी पुष्कर लाल ने बताया कि उन्होंने सप्ताह भर पहले ही पुरानी गाड़ी बेची थी। नई टैक्सी निकालकर स्वयं ही चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में तीन भाई और तीन बहनों में एक भाई की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है। मृतक के रिश्तेदार सूरज ने बताया कि 15 जून को ही नई टैक्सी ली थी। वह पिथौरागढ़ रूट में चला रहे थे। रिश्तेदारों के भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।