पिथौरागढ़। टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क के डामरीकरण के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी के साथ 80 करोड़ रुपये स्वीकृत हो गए हैं। हालांकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित सफर के लिए अभी इंतजार करना पड़ सकता है। मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर डामरीकरण का काम संभव नहीं होने के कारण सड़क की बदहाली दूर होने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है।
टनकपुर से पिथौरागढ़ तक करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत से बनी 150 किलोमीटर लंबी यह बारहमासी सड़क वर्तमान में जगह-जगह खराब हो चुकी है। सड़क पर गड्ढे बनने और कई स्थानों पर मलबा जमा होने से पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के लोगों के साथ ही पर्यटकों और आदि कैलाश यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों को उम्मीद थी कि डामरीकरण शुरू होने के साथ ही गड्ढों और जमा मलबे से निजात मिलेगी लेकिन मानसून के कारण काम शुरू होने में देरी होगी। एनएच खंड के अधिकारियों का भी कहना है कि बारिश के मौसम में डामरीकरण करना संभव नहीं है। ऐसे में इस मानसून में भी लोगों को खराब सड़क पर ही आवाजाही करनी पड़ेगी।
मलबा और बोल्डर हटने की उम्मीद भी कमजोर
पिथौरागढ़। ऑलवेदर सड़क पर बेलखेत, स्वाला, घाट और दिल्ली बैंड सहित कई स्थानों पर लंबे समय से मलबा जमा है। मलबे के ऊपर बड़े-बड़े बोल्डर भी खतरा बने हुए हैं। लोगों को उम्मीद थी कि डामरीकरण से पहले मलबे और बोल्डरों को हटाया जाएगा लेकिन मानसून को देखते हुए डामरीकरण का काम टलने के साथ ही मलबा हटाने की उम्मीद भी कमजोर पड़ गई है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर सड़क पर डामरीकरण के लिए हॉटमिक्स प्लांट और सामग्री की व्यवस्था करने में भी समय लगेगा। जल्द मानसून शुरू होने वाला है ऐसे में बारिश में डामरीकरण संभव नहीं होगा। फिलहाल एनएच पर झाड़ी कटान और नालियों की सफाई का काम किया जा रहा है। -विभोर गुप्ता, अधिशासी अभियंता, एनएच खंड, लोहाघाट