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किसानों की बात, लेकिन पहाड़ निराश

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एडवोकेट विनीत जोशी, कर मामलों के जानकार। - फोटो : PITHORAGARH
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बजट में पहाड़ की उपेक्षा का दर्द अमर उजाला संवाद में उभर कर सामने आया। लोगों ने कहा कि बजट में पहली बार 16 बिंदुओं पर किसानों को लेकर बात की गई है लेकिन इनमें से एक भी बात पहाड़ के किसानों के पक्ष की नहीं है। सोलर पंप पहाड़ में काम नहीं आएंगे और उनके उत्पाद भी आसानी से मैदान नहीं पहुंच सकेंगे।
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क्योंकि ट्रेन तो पहाड़ में है नहीं। हालांकि, इस दौरान टैक्स और बजट के अन्य प्रावधानों को लेकर लोगों की जिज्ञासाओं को चार्टर्ड अकाउंटेंट महेश जोशी ने शांत किया। उन्होंने बताया कि पहले इनकम पर 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 30 प्रतिशत के चार स्लैब थे अब इन्हें बढ़ाकर छह स्लैब कर दिए गए हैं। इनमें 15 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया है, जिसका फायदा करदाताओं को मिलेगा।
अमर उजाला कार्यालय में ‘बजट को समझिए’ विषय को लेकर आयोजित संवाद में वक्ताओं ने कहा कि इस समय बेरोजगारी बड़ी समस्या बनकर उभरी है। युवा नौकरियों के लिए भटक रहे हैं। बजट में नौकरियों का जिक्र नहीं है, सरकारी क्षेत्र में दो साल में केवल ढाई लाख सरकारी नौकरियों की बात कही गई है, जबकि बेरोजगारी करोड़ों में है। वक्ताओं ने कहा कि बजट में महंगाई पर नियंत्रण को लेकर सरकार से काफी उम्मीदें थीं।
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पर्वतीय क्षेत्र की कृषि के संरक्षण और पलायन की समस्या पर भी बजट में कोई प्रावधान नहीं रखने की बात कही गई। पहाड़ की 70 फीसदी कृषि मौसमी बारिश पर निर्भर है। सूखा या अतिवृष्टि की समस्या हर साल बनी रहती है। जंगली जानवर खेती को नष्ट कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को मेहनत का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। अधिकांश किसान कृषि छोड़कर पलायन कर रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्र के किसानों को राहत देने के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है।
बजट इकोनॉमी को केवल रिसेट करेगा
बजट के अनुुसार अब पांच करोड़ तक कारोबार पर आडिट नहीं होगा। अभी तक इसकी सीमा एक करोड़ ही थी। इससे व्यवसायी का विश्वास बढ़ेगा। प्रापर्टी पर टैक्स स्लैब को डेढ़ लाख से बढ़कर दो लाख कर दिया गया है। यह बड़ी राहत है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुछ अच्छे प्रावधान किए गए हैं। यह जो बजट है उससे बहुत बड़ा उतार या चढ़ाव नहीं आने वाला है। यह बजट इकोनॉमी को केवल रिसेट करेगा। - एडवोकेट विनीत जोशी, कर मामलों के विशेषज्ञ।
जमा रकम पर गारंटी बढ़ा देने से अब इनवेस्ट करेंगे लोग
बैंक खातों में जमा रकम पर बीमा गारंटी की सीमा पांच गुना बढ़ा दी है। इसका मतलब यह हुआ कि बैंक के डूब जाने के बाद भी जमाकर्ता को जमा रकम पर पांच लाख रुपए की बीमा गारंटी मिलेगी। सरकार ने जो बजट पेश किया है उसके अनुसार अब लोग इनवेस्ट करेंगे। करदाताओं को दो विकल्प दिए गए हैं। पांच लाख रुपये तक की आय पर नई व्यवस्था में भी कोई टैक्स नहीं देना होगा। उससे अधिक आय में तीन स्लैब निर्धारित किए गए हैं। कुल मिलाकर सरकार ने काफी बैलेंस बजट पेश किया है।
- महेश जोशी, चार्टर्ड एकाउंटेंट।

महेश जोशी, चार्टर्ड एकाउंटेंट।- फोटो : PITHORAGARH

थिरागढ़ में अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में उपस्थित लोग।- फोटो : PITHORAGARH

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