पिथौरागढ़। जिला अस्पताल रोड पर यातायात व्यवस्था पटरी से उतर गई है। दिन में कई बार जाम लगने से अस्पताल आने-जाने वाले मरीज, तीमारदार ही नहीं इस प्रमुख मार्ग से आवाजाही करने वाले सभी लोग परेशान हैं। हालात यह है कि अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में खड़ी की जा रहीं खाली एंबुलेंस भी जाम लगने का कारण बन रही हैं।
जिले भर के मरीज और तीमारदार जिला और महिला अस्पताल आते हैं। इसके बाद भी अस्पताल रोड पर यातायात व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। खासकर जिला अस्पताल में प्रवेश करने के दोनों गेट के आसपास यह समस्या गंभीर है। अस्पताल के आसपास चौपहिया और दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग की पर्याप्त और उचित व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल के बाहर सड़क पर हर दिन बिना मरीज के खाली खड़ीं पांच-सात एंबुलेंस इस समस्या को गंभीर बना रही हैं। ऐसे में आए दिन मरीज को अस्पताल ला रही एंबुलेंस परिसर के अंदर प्रवेश नहीं कर पा रही है। ऐसे में तीमारदारों के लिए मरीज को तुरंत अस्पताल के भीतर ले जाना चुनौती बना है। हालात यह है कि मरीज को तीमारदार सड़क पर उतारकर स्ट्रेचर के सहारे इमरजेंसी में ले जाने के लिए मजबूर हैं। इस अव्यवस्था से मरीज और तीमारदार परेशान हैं लेकिन जिम्मेदारों की नजर इस पर नहीं पड़ रही है।
इनसेट-
क्या करोगे चालान ही तो काटोगे
अस्पताल गेट के पास मुख्य सड़क पर काफी संख्या में एंबुलेंस खड़ी करना पहुंच आदि का खेल है। सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल में जिसकी जितनी सेटिंग हो वह एक नहीं कई बार एंबुलेंस सड़क पर बेखौफ खड़ी करता है। एक ट्रैफिक पुलिस कर्मी के अनुसार, टोकने या मना करने पर एंबुलेंस चालक यह तक कहते हैं कि क्या करोगे चालान ही तो काटोगे। कुछ वर्ष पूर्व पुलिस प्रशासन ने खाली एंबुलेंस को घंटाकरण से आगे खड़ी किए जाने की व्यवस्था बनाई थी जो कुछ समय बाद ही दम तोड़ गई। संवाद
कोट
गेट के आसपास सड़क किनारे एंबुलेंस खड़ी किए जाने से अस्पताल प्रशासन का कोई संबंध नहीं है। अव्यवस्था से कई बार हमें भी आने-जाने में दिक्कत होती है। अस्पताल की एंबुलेंस तय जगह पर खड़ी की जाती हैं।
-डॉ. डीपी सिंह, पीएमएस, जिला अस्पताल
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लगातार चेतावनी देने के बाद अस्पताल रोड पर अनावश्यक खड़ी की जाने वाली एंबुलेंस या अन्य वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। हमने साफ कहा है कि दो-तीन बार रडार में आने के बाद वाहन को टो कर लिया जाएगा।
-जितिन पाठक, यातायात निरीक्षक, पिथौरागढ़