आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से आपदा प्रभावित गांवों के सर्वे का काम शुरू किया गया है। बृहस्पतिवार को टीम मुनस्यारी पहुंच गई और सैनर, कुलथम, साना, कैठी, गोल्फा गांवों का दौरा करेगी। प्रदेश के पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में एक साथ यह सर्वे हो रहा है। हर जिले में चार-चार लोगों की टीम भ्रमण पर है। पहले चरण में प्रदेश के 100 गांवों का सर्वे होगा। दूसरे चरण में फिर से अन्य गांवों में सर्वे किया जाएगा।
भूवैज्ञानिक लेखराज ने बताया कि टीम 2013 की आपदा के बाद गांवों में आए बदलाव और खतरों की जानकारी हासिल कर रिपोर्ट शासन को देगी। उन्होंने कहा कि टीम यह पता करेगी कि गांव रहने लायक हैं या नहीं। यदि उनमें किसी प्रकार का खतरा हो तो उनको दूसरी जगह बसाने के लिए सिफारिश की जाएगी। बृहस्पतिवार को टीम सैनर गांव पहुंची है। टीम में शामिल भूवैज्ञानिक रवि नेगी ने बताया कि रिपोर्ट शासन को दी जानी है, इसलिए इसका ज्यादा प्रचार नहीं किया जा रहा है। क्योंकि यह पहले चरण का सर्वे है। अभी कम से कम तीन चरणों में सर्वे होना है। मुनस्यारी तहसील के दस गांवों तक यह टीम जाएगी।
बाद में धारचूला के गांवों में भी सर्वे होगा। सर्वे टीम में भूवैज्ञानिक प्रवीण कुमार, इंजीनियर शैलेंद्र नेगी और समाजविज्ञानी नरेश प्रसाद शामिल हैं। इधर, भूवैज्ञानिक लेखराज ने बताया कि इस तरह का सर्वे हर साल होता है। टीम अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देती है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राणा ने बताया कि पूरे प्रदेश में इस तरह का सर्वे चल रहा है। पिथौरागढ़ जिले के 21 गांवों में भी यह सर्वे होगा। यह रिपोर्ट आपदा प्रबंधन कार्यालय देहरादून को सौंपी जाएगी।