व्यास घाटी के गांवों में बडानी पूजा शुरू हो गई है। लोग पूजा के दौरान शिवरूपी लोकदेवता नमज्यूं की पूजा करते हैं। पूजा के लिए देवदार का करीब 50 फीट लंबा पेड़ लाया जा चुका है। इस पेड़ को दर्च्यो कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि लोकदेवता नमज्यूं ने अपने लिए देवदार की ही छड़ी तैयार की थी। यह पवित्र छड़ी हर गांव में नमज्यूं के मंदिर के आगे रख दी गई है।
बडानी पूजा का व्यास घाटी में बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि कैलास मानसरोवर के प्रवेश द्वार में नमज्यूं की उपासना करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। इस मौके पर परिवार के सबसे बड़े पुत्र को देवदर्शन के लिए ले जाया जाता है। बहनें अपने भाइयों के दीर्घजीवन के लिए मंगलकामना करती हैं। भादौ माह की पूर्णिमा तक चलने वाले कार्यक्रम के दौरान रोज भगवान के मंदिर में विशेष प्रकार का प्रसाद जिसे दलंग कहा जाता है, चढ़ाया जाता है। दलंग को आटे और दूध से तैयार किया जाता है। बडानी पूजा के समय प्रवास में रहने वाले सभी लोग अपने अपने घरों में पहुंच गए हैं। सुबह से पूजा-अनुष्ठान हो रहे हैं और शाम को लोकदेवता को प्रसन्न करने के लिए लोकगीत चल रहे हैं।
नमज्यूं के मुख्य देवडांगर आनंद सिंह गर्ब्याल और कृष्ण सिंह गर्ब्याल ने बताया कि पूजा से गांवों में सुख और समृद्धि आती है। उन्होंने कहा कि सभी लोग इस पूजा में हिस्सा ले रहे हैं। व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नाभी, रौंगकांग, कुटी, नपलच्यू गांवों में इन दिनों बडानी पूजा की धूम है। हर गांव में नमज्यूं के अलग अलग मंदिर बने हुए हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधान लक्ष्मी रायपा, पुष्पा देवी, गंगोत्री देवी सहयोग दे रही हैं। मुख्य पूजा 24 सितंबर को होगी।