पिथौरागढ़। बैठि रही अति सघन बन, पैठि सदन तन मांह, देखि दुपहरी जेठ की, छांहों चाहति छांह... कवि बिहारी का यह दोहा पहाड़ के बदलते मौसम पर सही साबित नहीं हो रहा है। कवि ने इस दोहे में जेठ मास की भीषण गर्मी का बखान किया है। इसमें भीषण धूप से बचने के लिए परछाई भी स्वयं छाया की तलाश कर रही है लेकिन सीमांत जिले में ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश के चलते जेठ मास में ऐसा लग रहा है कि सर्दियों के दिन फिर से लौट आए हैं। लोगों ने एक बार फिर से गर्म कपड़े निकाल लिए हैं।
रविवार की रात और सोमवार को फिर से हंसलिंग, राजरंभा, नाग्निधुरा, पंचाचूली और छिपलाकेदार की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई। मुनस्यारी में दोपहर दो बजे से रिमझिम बारिश शुरू हुई। बादल छाए रहने से पर्यटकों को भी बर्फ से आच्छादित चोटियों का आकर्षक नजारा देखने को नहीं मिल रहा है। जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में भी बूंदाबांदी हुई। बीच में कुछ दिन गर्मी का अहसास हुआ लेकिन पिछले चार दिन से रुक-रुक कर हो रही बारिश से लोग अभी भी स्वेटर और जैकेट पहनने के लिए मजबूर हैं।
रात में तापमान गिरने से लोग कंबल, रजाई ओढ़ कर सो रहे हैं। धारचूला स्थित दारमा और व्यास घाटी में भी ठंड बरकरार है। लगातार हो रही बारिश से किसान भी परेशान हैं। सीजनल फलों को अपेक्षित गर्माहट नहीं मिलने से उनकी बढ़वार, मिठास पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अस्कोट क्षेत्र के काश्तकार ललित मोहन ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से आम, लीची, आड़ू, खुमानी समेत सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचा है।
सड़कों पर खतरा बने पेड़ बन सकते हैं हादसे का कारण
सीमांत जिले की सड़कों पर अंधड़ से पेड़ गिरने का सिलसिला जारी है। सातसिलिंग-थल, थल-मुनस्यारी, पिथौरागढ़-धारचूला सहित अन्य प्रमुख सड़कों पर 120 से अधिक पेड़ ऐसे हैं जो अंधड़ से कभी भी गिर सकते हैं। धारचूला हाईवे पर सल्मोड़ा के पास कई पेड़ गिर चुके हैं तो कई गिरने के कगार पर हैं। इस हाईवे पर रोजाना सैकड़ों वाहन आवाजाही करते हैं। इन दिनों आदि कैलाश यात्रा के लिए भी देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में खतरा बने ये पेड़ किसी बड़ी घटना का कारण बन सकते हैं। वन विभाग सबकुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है।
सड़कों पर खतरा बने पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव स्थानीय वन पंचायतों से मांगा गया है। प्रस्ताव मिलने के बाद भी इन पेड़ों को हटाना संभव है। - दिनेश जोशी, रेंजर, पिथौरागढ़