पहाड़ के जंगलों की आग का असर अब शहरों, कस्बों में दिखाई देने लगा है। मंगलवार को जिला मुख्यालय के साथ ही कई इलाकों को धुएं ने अपनी आगोश में ले लिया। हर तरफ धुंध के चलते लोग आंखों में जलन की शिकायत करते दिखे। वहीं, जंगलों की आग पर जंगलात, प्रशासन और शासनतंत्र की गंभीरता अब तक नजर नहीं आई।
पहाड़ करीब एक महीने से दावाग्नि की चपेट में है। हर जिला, हर इलाका आग की चपेट में है। कई जंगल आग की भेंट चढ़ गए हैं, लेकिन वन महकमे के साथ ही प्रशासन, सरकार की सक्रियता इस मामले में नहीं दिखाई दे रही है। आग से जंगलों को बचाने में सरकारी तंत्र तो उदासीन है ही, स्थानीय लोग जो इन जंगलों का उपभोग कर रहे हैं, उनकी भी बहुत ज्यादा रुचि जंगलों को बचाने में नहीं है।
भैंसखाल के लोगों ने दिखाया जज्बा
हालांकि, प्रशासन और शासन तंत्र आग की भेंट चढ़ रहे जंगलों को बचाने में कोई खास सक्रिय नहीं दिखाई दे रहा है, लेकिन नाचनी के भैंसखाल ग्राम पंचायत के लोगों खासकर महिलाओं ने जंगल की आग से कई बार मुकाबला किया है। महिलाएं चौड़ी पत्ती के पेड़ों से लदे अपने जंगल को बचाने में कुछ हद तक कामयाब भी रहीं हैं।
चारा विकास नर्सरी के 6000 पौधे जले
धरमघर। वन पंचायत दशौली में चारा विकास नर्सरी में आग से विभिन्न प्रजातियों के 6000 पौधे नष्ट हो गए। सोमवार रात करीब 12 बजे नर्सरी में अचानक आग लग गई। नर्सरी की अध्यक्ष हेमा पाठक ने घटना की सूचना प्रशासन को देते हुए बताया कि नर्सरी में 5 हेक्टेयर क्षेत्र में बांज, फल्यांट के साथ ही विभिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण किया गया था। नेपियर घास भी नर्सरी में अच्छी हो रही थी। आग से सब नष्ट हो गया। उन्होंने जानबूझ कर आग लगाने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
हर तरफ आग ही आग
नाचनी/बेड़ीनाग/अस्कोट। नाचनी वन पंचायत टिम्टिया में सोमवार शाम छह बजे से आग लगी है। ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह धर्मशक्तू, वन पंचायत सरपंच मोहन पंत के नेतृत्व में ग्रामीणों की टीम ने रात 11 बजे आग पर काबू पाया। मंगलवार सुबह फिर जंगल में आग भड़क गई। दोपहर करीब दो बजे आग पर काबू पाया। बेड़ीनाग के देवीनगर, साहगराऊं, ओड्यारी, चौकोड़ी, राईआगर, कांडेेकिरौली के जंगल बुरी तरह आग से घिर गए हैं। जंगलों में लगी आग से कीमती वन संपदा का नुकसान हो रहा है। सोमवार रात देवीनगर में आग आबादी की ओर बढ़ने लगी। लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उधर, अस्कोट के धौलकोट के जंगल में सोमवार से लगी आग का असर मंगलवार को कुछ कम हुआ है। आग से बहुमूल्य वनस्पति जल गई है।
ये इलाके वाले भी आग, धुंध से परेशान
थल/गणाईगंगोली/कनालीछीना/गंगोलीहाट। थल, गणाईगंगोली, कनालीछीना, गंगोलीहाट क्षेत्र में जंगलों की आग से वातावरण में धुंध का जबरदस्त प्रकोप हो गया है। जंगलों की आग में पेड़, पौधे नष्ट हो रहे हैं। आग का असर जलस्रोतों पर भी पड़ा है। जलस्रोतों में पानी कम होने लगा है।
आग लगाने वालों पर कार्रवाई न होने का मामला उठा
नाचनी। एसडीएम वैभव गुप्ता ने वनाग्नि नियंत्रण को लेकर भैंसखाल में पंचायत प्रतिनिधियों और वन पंचायत सरपंचों के साथ गोष्ठी की। गोष्ठी में प्रधान और वन पंचायत सरपंचों ने जंगलों में आग लगाने वाले तत्वों पर कार्रवाई न होने का मामला प्रमुखता से उठाया। भैंसखाल की प्रधान चंद्रकला दानू की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में वन पंचायत सरपंच भैंसखाल द्रोपदी देवी, रसियाबगड़ की सरपंच तुलसी देवी ने आग बुझाने के लगातार प्रयास के बाद भी करीब 70 प्रतिशत जंगल नष्ट होने का मामला एसडीएम के सामने उठाया। इन लोगों ने पास के गांव के 18 संदिग्धों के नाम एसडीएम को सौंपे। कहा कि यह लोग जंगलों में आग लगाने में शामिल हो सकते हैं। एसडीएम ने कहा आग लगाने के प्रकरण की जांच कराई जाएगी, यदि इसमें किसी का हाथ रहा होगा तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। एसडीएम ने वन विभाग को आग पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के जंगल भी आग की चपेट में
मुनस्यारी। उच्च हिमालयी क्षेत्र के जंगल भी इस बार आग की चपेट में हैं। कनलगा राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत जोशा के जंगल में आग लग गई है। इस जंगल में देवदार, थुनेर, सुरई, बांज, खरसु के पेड़ हैं। छोटे पेड़ों को आग से भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। प्रधान संगठन के अध्यक्ष हरीश उप्रेती ने बताया कि यदि जल्दी आग पर काबू नहीं पाया गया तो बहुमूल्य वनस्पति को नुकसान होगा। वन रेंजर लवराज सिंह ने बताया कि आग लगने की सूचना के बाद विभाग की टीम वन दरोगा नंदराम के नेतृत्व में भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि आग पर जल्दी काबू पा लिया जाएगा।