लघु जल विद्युत निगम ने जिले में चार परियोजनाओं से 45 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य तय किया है। यह बिजली जिले की खपत से कहीं ज्यादा होगी। जिले में 35 मेगावाट बिजली की रोजाना जरूरत रहती है। निगम इस समय सुरिंगगाड़ फेज 2 के निर्माण के काम में जुटा है। यह परियोजना मार्च 2018 में पूरी होगी। परियोजना से उत्पादित होने वाली पांच मेगावाट बिजली को मुनस्यारी नगर और आसपास के गांवों में दिया जाएगा।
निगम ने धारचूला तहसील के तांकुल में 12 मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नोडल अधिकारी को भेज दी है। उम्मीद है कि जल्द ही परियोजना के लिए धनराशि मिल जाएगी। लघु जल विद्युत निगम के उपमहाप्रबंधक जीएस बुदियाल और सहायक अभियंता उमेश जोशी ने बताया कि तांकुल परियोजना को शुरू करने में अब कोई दिक्कत नहीं है। साइट का चयन कर लिया गया है। यह कोशिश की जाएगी कि परियोजना को आपदा के समय किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। इसी तरह जिंबागाड़ परियोजना की डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। जिंबागाड़ से 19 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिंबागाड़ में पर्याप्त पानी है और गर्मियों में भी टरबाइन चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहेगा।
उन्होंने बताया कि एक अन्य परियोजना पैनागाड़ में प्रस्तावित है। 9 मेगावाट की इस परियोजना की डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। श्री बुदियाल ने बताया कि यदि यह चारों परियोजनाएं बन जाएंगी तो जिले की जरूरत से कहीं ज्यादा बिजली पैदा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार छोटी बिजली परियोजनाओं को संचालित करने में ज्यादा रुचि ले रही है। आने वाले समय में कुछ और नदियों पर बिजली परियोजनाओं के निर्माण के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।