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छोटा कैलास यात्रा

Sat, 13 Feb 2016 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,धारचूला /पिथौरागढ़
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समुद्र सतह से लगभग 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित छोटा कैलाश की यात्रा को अमरनाथ और वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित करने की मांग उठने लगी है। छोटा कैलास के लिए गुंजी से कुटी, ज्योलिंगकांग होते हुए रास्ता जाता है। हरेभरे बुग्यालों से होकर छोटा कैलास का यात्रा मार्ग बना है।
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छोटा कैलास में नीले रंग का पार्वती सरोवर और बर्फ से ढका छोटा कैलास पर्वत है। कहा जाता है कि पांडवों ने यहां प्रवास किया था। माता कुंती के लिए कुटी गांव में कुटिया बनाई थी। इसी कारण गांव का नाम कुटी पड़ा। छोटा कैलास को आदि कैलास भी कहा जाता है। भगवान शंकर का मूल स्थान इसी को माना गया है। जो लोग कैलास मानसरोवर की यात्रा नहीं कर पाते वह छोटा कैलास जाकर ही अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करते हैं। छोटा कैलास में सुविधाओं का अभाव है। लोग चाहते हैं कि उत्तराखंड में छोटा कैलास की यात्रा को अमरनाथ और वैष्णो देवी की यात्रा की तरह विकसित की जाए। इससे पर्यटन की गतिविधियां बढ़ेंगी।

कैसे पहुंचें छोटा कैलास
छोटा कैलास की टनकपुर रेलवे स्टेशन से दूरी 357 किलोमीटर है। टनकपुर से धारचूला की दूरी 240 किलोमीटर है। यहां तक टैक्सी और बसों की सेवा है। धारचूला से छोटा कैलास की दूरी 95 किलोमीटर दूरी पर देश का अंतिम गांव कुटी है। कुटी से छोटा कैलास की दूरी 12 किलोमीटर है। यह सारा सफर पैदल होता है।
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1994 से शुरू हुई छोटा कैलास यात्रा
कुमाऊं मंडल विकास निगम ने 1994 से छोटा कैलास की यात्रा शुरू कराई थी। उस बार तीन बैचों में 59 यात्री गए। तब से लेकर अब तक 140 दलों में 2908 यात्री छोटा कैलास के दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2015 में छोटा कैलास के लिए 20 दलों का निर्धारण किया गया लेकिन खराब मौसम के चलते सभी दल यात्रा नहीं कर पाए। छोटा कैलास की यात्रा कैलास मानसरोवर यात्रा के साथ साथ चलती है।
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