उत्तराखंड लघु जल विद्युत निगम ने धारचूला तहसील में पर्याप्त पानी वाली नदियों में बिजली परियोजना स्थापित करने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू कर दिया है। कुल चार परियोजनाओं से 27.5 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है, यदि इतनी बिजली जिले में पैदा हो जाती है तो ग्रिड पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी और सरप्लस बिजली ग्रिड को बेची जाएगी।
लघु जल विद्युत निगम ने धारचूला तहसील के तांकुल में 12 मेगावाट की बिजली परियोजना के निर्माण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण होना है। परियोजना निर्माण के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) आर्थिक सहयोग देगा। परियोजना की डीपीआर तैयार कर ली गई है। अब इसके निर्माण में किसी प्रकार की बाधा नहीं है। दूसरी परियोजना धारचूला तहसील के ही सोबला में बनेगी। सोबला परियोजना 2013 की आपदा के समय पूरी तरह नष्ट हो गई थी। उसकी नहर का हेड बह गया था। अब सोबला में नए सिरे से बिजली परियोजना बनेगी।
इससे आठ मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना का डिजायन अब दूसरे तरीके से किया जाएगा, ताकि नदी में बाढ़ आने पर उसे किसी प्रकार का खतरा न हो। लघु जल विद्युत निगम ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ऐलागाड़ की तीन मेगावाट क्षमता वाली बिजली परियोजना को उरेडा से हटाकर अपने अधीन कर लिया है। ऐलागाड़ परियोजना की क्षमता अब छह मेगावाट की हो जाएगी। इसमें दो-दो मेगावाट के तीन टरबाइन लगाए जाएंगे। इसी तरह 1.5 मेगावाट की छिरकिला परियोजना को भी लघु जल विद्युत निगम ने उरेडा से हटाकर अपने हाथ में ले लिया है। इस परियोजना के हेड की मरम्मत की जानी है। बाद में उत्पादन शुरू हो जाएगा।
जल विद्युत की अपार संभावनाएं
उत्तराखंड लघु जल विद्युत निगम के महाप्रबंधक अजय पटेल एवं उपमहाप्रबंधक जीएस बुदियाल ने बताया कि धारचूला और मुनस्यारी क्षेत्र में विद्युत उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। कोशिश की जाएगी कि अन्य नदियों में भी बिजली परियोजनाओं का निर्माण हो और बिजली की जरूरत को पूरा किया जा सके। सरकार भी इसमें रुचि दिखा रही है।