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वसंत ऋतु का इंतजार छोड़ पहले ही खिला प्यौली

Thu, 31 Dec 2015 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
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जलवायु परिवर्तन का असर अब फलों के साथ ही फूलों पर भी पड़ने लगा है। वसंत ऋतु में खिलने वाला प्यौली का फूल इस बार दिसंबर में ही खिलने लगा है।
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पिछले दिनों हमने अस्कोट में समय से पहले काफल के पेड़ों में फल लगने, लीची के पेड़ में बौर आने की खबर प्रकाशित की थी। अब थल में प्यौली के फूल खिलने का मामला सामने आया है। प्यौली का वसंत ऋतु के साथ गहरा नाता है। एक गढ़वाली गीत में भी इसका उल्लेख ‘कभी त आलो वसंत कभी त हंसलि प्यौली’ बोलों से किया गया है। अर्थात् वसंत आएगा तो प्यौली फूलेगी।
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वसंत ऋतु का आगमन मार्च, अप्रैल में होता है। समय से पहले प्यौली में फूल आने से लोग आश्चर्य में है। प्यौली का वैज्ञानिक नाम थ्लनसप है। समय से पहले फल, फूल होने को अच्छा नहीं माना जा रहा है। इसे ग्लोबल वार्मिंग से जोड़कर देखा जा रहा है। थल में हजेती के जंगल के साथ ही थल बाजार में वसंत ऋतु में प्यौली के फूल खिलते थे। इस बार थल बाजार से सटे खेतों में अभी से प्यौली खिल गई है।
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