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विख्यात संत शंकर गिरी महाराज ब्रह्मलीन

Wed, 04 Jan 2017 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गंगोलीहाट/पिथौरागढ़
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ब्रह्मलीन संत दिगंबर शंकर गिरी महाराज - फोटो : अमर उजाला
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सिद्ध संत की ख्याति प्राप्त श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के महात्मा श्री दिगंबर शंकर गिरी महाराज ब्रह्मलीन हो गए है। उन्होंने बुधवार तड़के करीब 5 बजे हरिद्वार के श्यामपुर स्थित अपने आश्रम में शरीर त्यागा। गंगोलीहाट का महाकाली मंदिर शंकर गिरी महाराज की तपस्थली रहा है। उनके इस दुनिया में न रहने से उनके भक्त बेहद गमगीन हो गए हैं। शंकर गिरी महाराज की उम्र 110 साल से अधिक बताई जाती है।
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संत शंकर गिरी महाराज 70 के दशक में पहली बार गंगोलीहाट आए। उन्होंने लंबे समय तक हाट कालिका दरबार से नीचे स्थित भगवान शंकर की मुक्तेश्वर गुफा में तपस्या की। निर्जन में स्थित इस गुफा में बाबा रात के एकांत में तप करते थे। संत ने महाकाली मंदिर में चार सहस्त्रचंडी यज्ञों का आयोजन किया था। बाबा की कर्मस्थली हाट कालिका के साथ ही हरिद्वार का माया देवी मंदिर और हिमाचल के सैंज का आश्रम था। भक्ति में लीन बाबा ने जूना अखाड़े के कोतवाल समेत कई पद ग्रहण नहीं किए थे।

वह समाजसेवा भी करते थे। गंगोलीहाट के जाखनी के वैष्णवी मंदिर तक श्रमदान से सड़क का निर्माण शुरू कराया। करीब तीन किमी कच्ची सड़क बाबा के प्रयास से बनी है। बुधवार सुबह महाराज के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही उनके शिष्य श्रीनागा चेतन गिरी महाराज समेत कई भक्त हरिद्वार रवाना हो गए हैं। बृहस्पतिवार को हरिद्वार में उनकी समाधि लगाई जाएगी।
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संग्रहणीय हो गई अमर उजाला की ‘हैलो गणाईगंगोली’
गंगोलीहाट/गणाईगंगोली। 2 जनवरी को इलाके में बंटी अमर उजाला की ‘हैलो गणाईगंगोली’ पत्रिका के कवर पेज पर नीब करौली महाराज, नानतिन महाराज के साथ ब्रह्मलीन संत श्री दिगंबर शंकर गिरी महाराज की फोटो लगी है। शंकर गिरी महाराज के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही इलाके के लोग ‘हैलो गणाईगंगोली’ के अंक को सलीके से संभालते देखे गए।
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