उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून में संबद्ध किए गए इस जिले के सात आयुर्वेदिक डॉक्टरों की संबद्धता शासन ने समाप्त कर दी है। इन सभी डॉक्टरों को अब मूल अस्पतालों में ज्वाइनिंग देनी होगी। उत्तराखंड शासन के सचिव हरबंस सिंह चुघ ने 10 अप्रैल को जारी आदेश में इन डॉक्टरों की संबद्धता समाप्त कर दी। अब तक इन डॉक्टरों का वेतन तो पिथौरागढ़ से निकल रहा था और यह सभी देहरादून में ड्यूटी दे रहे थे। यह मामला पिछली सरकार के समय भी काफी उछला था। क्योंकि सात आयुर्वेदिक अस्पतालों में डॉक्टर न होने के कारण ताले लग गए थे।
शासन के सचिव चुघ ने आयुर्वेदिक निदेशक, आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति को भेजे पत्र में कहा है कि विभाग में अब किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को संबद्ध नहीं किया जाएगा और तत्काल प्रभाव से यह व्यवस्था समाप्त हो गई है। सूत्रों के अनुसार अब तक आयुर्वेद विश्वविद्यालय में संबद्ध सातों डॉक्टरों को विश्वविद्यालय ने अपने यहां से कार्यमुक्त कर दिया है। इनमें घाट, जजुराली, खतेड़ा, अलगड़ा, डीडीहाट, देवीसूना और गर्खा के अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर शामिल हैं। घाट और जजुराली के डॉक्टर वर्ष 2013 में और खतेड़ा, अलगड़ा, डीडीहाट, देवीसूना, गर्खा के डॉक्टर जून 2016 में आयुर्वेद विश्वविद्यालय में गए थे।
पिछली सरकार ने भी इन डॉक्टरों को मूल अस्पतालों में जाने के आदेश दिए थे, लेकिन किसी ने भी इस आदेश का पालन नहीं किया। इस मामले में पूर्व जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने भी शासन को पत्र लिखा था। अब उम्मीद की जा रही है कि डॉक्टरों के वापस आने से अस्पतालों के ताले खुल जाएंगे। जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डा. जीसीएस जंगपांगी ने बताया कि सभी डॉक्टरों को विश्वविद्यालय से कार्यमुक्त कर दिया गया है। यदि कोई डॉक्टर अपने मूल अस्पताल में नहीं जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।