मिलम ग्लेशियर जाने वाले पर्यटकों को इस बार भी कड़वे अनुभवों से गुजरना पड़ रहा है। दो दिन पहले प्रशासन से अनुमति न मिल पाने के कारण लीलम तक पहुंचे रूस के दो पर्यटकों को वापस लौटना पड़ा और बृहस्पतिवार को पोलैंड के एक पर्यटक के साथ भी यही समस्या आ गई। उनको भी मिलम ग्लेशियर जाने की अनुमति नहीं मिल पाई है। वह भी यहां से लौट गए हैं।
बताया गया कि प्रशासन इस मामले में किसी प्रकार का रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है, जबकि लोनिवि ने स्पष्ट कर दिया है कि मिलम जाने वाला ट्रैकिंग रूट सही हालत में है और उसमें किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी। आईटीबीपी ने भी अपने मजदूरों की टीम के रवाना होने के बाद पर्यटकों को जाने देने पर सहमति जताई है। मिलम ट्रैकिंग रूट पर पर्यटकों को अनुमति न मिलने से यहां साहसिक पर्यटन और ट्रैकिंग से जुड़ी संस्थाओं में नाराजगी है।
मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने इस मामले की जानकारी फोन से पर्यटन सचिव शैलेश बगौली को भी दी है। बृहस्पतिवार को एसडीएम विवेक प्रकाश ने इस मुद्दे पर बाकायदा ट्रैकिंग से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और लोनिवि की बैठक बुलाई। बैठक में ट्रैकिंग रूट पर किसी प्रकार की दिक्कत न होने की बात सामने आने के बाद भी प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। पोलैंड निवासी ट्रैकर पीटर मारटस ने बताया कि वह पहली बार मुनस्यारी से मिलम जाने की इच्छा से आए थे, लेकिन अनुमति न मिलने से उनको लौटना पड़ रहा है। लोनिवि के जेई महेंद्र वर्मा ने एसडीएम को जानकारी दी कि मिलम ट्रैकिंग रूट पर किसी प्रकार की समस्या नहीं है। वहीं, प्रशासन के रवैये से ट्रैकिंग से जुड़ी संस्थाओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि तत्काल इस समस्या का समाधान निकलना चाहिए। ताकि पर्यटन व्यवसाय पर कोई असर न पड़े।