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खाल तस्करी के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा

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खाल तस्करी के एक मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए आरोपी को तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार 23 दिसंबर 2010 को मुखबिर ने धारचूला के वन क्षेत्राधिकारी बालम सिंह अल्मिया को फोन पर एक व्यक्ति के पास तेंदुए की खाल होने की सूचना दी। वह खाल को बाइक से धारचूला से गोठी ले जा रहा है। सूचना के आधार पर वन क्षेत्राधिकारी अल्मिया, वन दरोगा दिनेश चंद्र जोशी, वन रक्षक गंगा सिंह धामी, कैलाश सिंह वन विभाग के गलाती बैरियर पर पहुंचे।
शाम को लगभग 4 बजे मोटर साइकिल पर आ रहे एक व्यक्ति को रुकने को कहा तो वह भागने का प्रयास करने लगा। वन कर्मियों ने उसे पकड़ लिया। मोटर साइकिल के पीछे बंधे प्लास्टिक की थैली की तलाशी ली गई। थैली में अखबार में लिपटी तेंदुए की खाल बरामद हुई। आरोपी ने अपना नाम कैलाश उर्फ गुल्लू उर्फ गुलाब सिंह कुटियाल बताया।
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मामले की विवेचना उप प्रभागीय वनाधिकारी महिपाल सिंह सिरोही ने की। परिवाद न्यायालय में पेश किया गया। मामले में पांच गवाह पेश किए गए। 8 सितंबर 2014 को डीडीहाट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि प्रकाश ने मामले के परीक्षण के बाद आरोपी को तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। आरोपी ने फैसले के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में अपील की।
5 दिसंबर 2019 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। आरोपी इन दिनों अंतरिम जमानत पर था। सजा सुनाने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह बनकोटी ने पैरवी की।
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