माउंट एवरेस्ट विजेता योगेश गर्ब्याल और उनकी टीम ने राजे ज्यु के बेस के पास खोजा तालब।
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धारचूला(पिथौरागढ़)। माउंट एवरेस्ट विजेता योगेश गर्ब्याल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने पहली बार सेला पास दर्रे में 5100 मीटर की ऊंचाई पर देश और सीबीटीएस संस्था का झंडा फहराया। इस टीम ने राजे ज्यु के बेस में एक खूबसूरत तालाब को भी खोजा है। इस ताल को आज तक किसी ने नहीं देखा था।
क्लाइंबिंग बियौंड द समिट्स (सीबीटीएस) टीम 18 किलोमीटर दुर्गम सेला पास दर्रा का सफल आरोहण कर धारचूला पहुंचीं। सेला पास दर्रा व्यास घाटी के कुटी गांव को दारमा घाटी के सेला गांव को जोड़ता है। इसे नामा पास के नाम से भी जाना जाता है। माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही योगेश गर्ब्याल ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आदि कैलाश रेंज के नामा वैली में पर्वतारोहण की संभावनाओं को तलाशना और क्षेत्र के युवाओं को अपने पूर्वजों के उपयोग किए जाने वाले हिमालय दर्रों को जीवंत करना है। टीम 9 से 16 अक्तूबर के बीच नामा वैली के आसपास क्षेत्रों का भ्रमण किया और चिपेदं पीक (पीकॉक पीक), राजे ज्यु पीक में रेकी की।
बुजुर्ग कुंदन ने सेला पास कई बार किया पार
धारचूला (पिथौरागढ़)। योगेश गर्ब्याल ने बताया कि टीम के सदस्यों को कुटी गांव के बुजुर्गों ने सेला पास और क्षेत्र के पुराने किस्से भी सुनाए। कुटी गांव के 80 वर्षीय कुंदन सिंह कुटियाल एकमात्र ऐसे बुजुर्ग हैं, जिन्होंने सेला पास को कई बार पार किया है। क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार दशकों पहले दोनों घाटी के लोग स्योनो ला और सेला से आवागमन करते थे। पर समय के साथ और ग्लेशियर के पिघलने से यह रास्ता पहले की अपेक्षा कठिन और दुर्गम होता चला गया।