जर्जर हालत में पहुंचा राजकीय प्राथमिक स्कूल सीपालथौड़ का भवन
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इस तहसील के दूरस्थ राजकीय प्राथमिक स्कूल सेकलीधार के ताले नए शिक्षासत्र में नहीं खुल पाए। एक अप्रैल से विद्यालय में ताला लगा है। सबसे बड़ी समस्या कक्षा पांच पास कर जूनियर हाइस्कूल में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए आ गई है। उनको स्कूल से टीसी देने के लिए कोई अध्यापक नहीं है। विद्यालय में पढ़ने वाले 25 बच्चों को घर बैठना पड़ रहा है। इससे पहले मार्च में गांव के लोगों ने अपने संसाधनों से एक बेरोजगार शिक्षक की विद्यालय में तैनाती की थी, लेकिन उसके पास सरकारी स्कूल को संचालित करने के लिए कोई अधिकार नहीं थे। इस कारण उसने भी विद्यालय आना बंद कर दिया है।
स्कूल में चल रही अव्यवस्था से अभिभावक खासे परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकारी तंत्र की लापरवाही से उनके बच्चों का भविष्य चौपट हो रहा है। बताया गया कि विद्यालय में कार्यरत दो शिक्षकों का एक साथ स्थानांतरण तो कर दिया गया, लेकिन उनकी जगह किसी की तैनाती नहीं हुई। ग्राम प्रधान विमला देवी ने पहले इस मामले की जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी आरएस ऐरी को दी। जब कोई समाधान नहीं हुआ तो वह मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया से मिलने पिथौरागढ़ चली गईं। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा कि सेकलीधार विद्यालय से दोनों शिक्षकों का एक साथ स्थानांतरण होने के कारण यह समस्या आई है। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि दो दिन के भीतर किसी नजदीकी विद्यालय से कम से कम एक शिक्षक को सेकलीधार स्कूल में भेजा जाए।
सीपालथौड़ स्कूल का भवन बैठने लायक नहीं
दूरस्थ इलाकों में सरकारी प्राथमिक शिक्षा की कितनी दुर्गति है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2013 की आपदा के समय क्षतिग्रस्त प्राथमिक स्कूल सीपालथौड़ के भवन की अब तक मरम्मत नहीं हो पाई है। भवन की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। छत टूट गई है। खिड़की और दरवाजों में लगी लकड़ी सड़ गई है। अब विद्यालय के शिक्षक कमरों में बच्चों को नहीं बैठाते। क्योंकि किसी भी समय हादसा हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार प्राथमिक शिक्षा की दशा सुधारने के लिए सिर्फ घोषणा करती है। ग्राम प्रधान विमला देवी ने भवन की दुर्दशा की जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी राम सिंह ऐरी को दी है। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए आपदा मद से धन की मांग की गई थी, लेकिन अब तक धन नहीं मिला है। भवन की दुर्दशा की रिपोर्ट हर महीने अधिकारियों के स्तर से शासन को भेजी जाती है। इस स्कूल में शिक्षक तो हैं, लेकिन भवन इतनी खतरनाक हालत में पहुंच गया है कि उसमें कभी भी हादसा हो सकता है। जनप्रतिनिधियों और पिछले दिनों चुनाव में व्यस्त नेताओं को स्कूल की यह दुर्दशा नजर नहीं आई।