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बोरागांव की संजना ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर रचा इतिहास

Sat, 28 Apr 2018 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
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संजना आर्य - फोटो : अमर उजाला
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तल्लाजोहार के बोरागांव की मूल निवासी संजना आर्य ने देश में 704वीं रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली है। संजना ने पहले ही प्रयास में यह परीक्षा पास की है। गौर करने वाली बात यह है कि संजना ने परीक्षा की तैयारी भी अपने बूते की है, इसके लिए उन्होंने किसी तरह की कोचिंग भी नहीं ली।

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24 नवंबर 1990 को रमेश राम और हरिप्रिया आर्य के घर में पैदा हुई इस होनहार बेटी ने 12वीं तक की शिक्षा दिल्ली कान्वेंट स्कूल से हासिल की। बीए लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से समाजशास्त्र विषय से एमए की शिक्षा ग्रहण की। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में संजना ने बताया कि वह वर्ष 2014 से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहीं थी। रोजाना 12 से 14 घंटे पढ़ाई करती थीं। बताया कि उन्होंने इसके लिए किसी तरह की कोचिंग नहीं ली। पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास करने से संजना काफी खुश हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में उनका चयन प्रोफेसर के पद के लिए हो गया था, लेकिन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने की चाह के कारण उन्होंने इस पद पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया। संजना के पिता रमेश राम दिल्ली शिक्षा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। माता हरिप्रिया आर्य दिल्ली के संत निरंकारी कन्या महाविद्यालय में प्रवक्ता हैं। संजना का छोटा भाई हिमांशु दिल्ली से एमए कर रहा है।
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संजना की उपलब्धि से गांव और क्षेत्र में खुशी 
संजना की उपललब्धि से बोरागांव के साथ ही संपूर्ण तल्लाजोहार में खुशी का माहौल है। संजना के ताऊ नारायण राम के घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। नारायण राम ने घर आने वाले लोगों का मुंह मीठा कराया। परिवारजनों ने गांव में पटाखे फोड़े।  

दादा के संघर्ष और ताऊ की जीवटता से संजना को मिला मुकाम 
संजना आर्य की सफलता में उनके दादा गजेराम का संघर्ष और ताऊ नारायण राम की जीवटता का भी बड़ा हाथ है। संजना के ताऊ ने दिल्ली में अपने लिए मुकाम बनाने के साथ अपने छोटे भाई संजना के पिता रमेश राम को भी उसकी मंजिल तक पहुंचाया। तल्लाजोहार के बोरागांव की मूल निवासी संजना के दादा गजे राम लोहे के कृषि उपकरण बनाने वाले जानेमाने कारीगर थे। उन्होंने अपने संघर्ष के बूते बड़े बेटे नारायण राम को इंटर तक की शिक्षा दिलाने के बाद दिल्ली भेज दिया। नारायण राम की पढ़ाई के दौरान दूर संचार विभाग में नौकरी लग गई। रोजगार मिलते ही उन्होंने छोटे भाई रमेश राम को दिल्ली बुला लिया। रमेश को दिल्ली विवि से स्नातक कराया और रोजगार हासिल करने के काबिल बनाया। नारायण राम पिछले साल दूर संचार विभाग के सेक्शन आफीसर पद से सेवानिवृत्त होने के बाद गांव लौटकर अपने पुस्तैनी काम को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। वह भविष्य में कांसे के बरतन व्यवसाय में कदम रखना चाहते हैं। नारायण राम का बेटा, बहु और बेटी दिल्ली में रहते हैं। 

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