जिले की सभी बाजारों में बिक्री में गिरावट का क्रम जारी है। हालांकि व्यापारी इस बात से आश्वस्त नजर आए कि जल्दी ही सब कुछ सामान्य होने लगेगा, लेकिन बाजार की जानकारी रखने वालों का कहना है कि अभी बाजार के गति पकड़ने में लंबा वक्त लग सकता है। वहीं, ग्रामीण अंचलों से लोगों का बाजार आना बंद हो गया है।
इसका असर टैक्सी चालकों पर भी पड़ा है। टैक्सियों को यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। देर रात तक खुले रहने वाले होटलों में अब शाम होते ही ताला लग रहा है। दुकानों में ग्राहक नहीं हैं। लोगों ने अपनी थोड़ी पूंजी सब्जी, दूध तथा रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं के लिए बचाकर रख दी है। बड़ा सामान बिकना बंद है। दुकानदार इसी उम्मीद में रोज दुकान खोल रहे हैं कि शायद आज बिक्री बढ़ेगी, लेकिन उनको शाम तक निराशा हाथ लग रही है।
नगर के 30 फीसदी व्यापारी ऐसे हैं, जिनकी दिनभर में एक पैसे की बिक्री नहीं हो पा रही है। कास्मेटिक, मोबाइल, फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक्स सामान, रेडीमेड कपड़ों के व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान हैं। परचून की दुकानों से थोड़ा बहुत बिक्री तो हो रही है, लेकिन उनमें भी 70 फीसदी तक गिरावट आ गई है। नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष शमशेर महर ने कहा कि छोटा व्यापारी सबसे ज्यादा परेशानी में आ गया है। दिन में कमाकर शाम को रोटी की व्यवस्था करने वाले व्यापारियों की मुसीबत दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। वह कहते हैं कि सब कुछ सामान्य होने में कम से कम छह महीने लग जाएंगे। जिले के हर कस्बे, नगर, गांवों की दुकानों का यही हाल है।
सामान की खपत में भारी गिरावट
थोक व्यापारी सोहन चंद्र गुप्ता का कहना है कि सामान की खपत में भारी गिरावट आ गई है। अब न तो छोटे व्यापारियों के पास पैसा बचा है और न आम लोगों के पास। थोक का काम करने वालों के सामने नया संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि बैंकों से तेजी से रुपये मिलने लग जाएं तो स्थिति थोड़ा सुधर सकती है।
मोबाइल सेट खरीदने अब कोई नहीं आता
मोबाइल फोन विक्रेता मोहम्मद रहबर का कहना है कि नोटबंदी के बाद बैंकों की तैयारी नाकाफी रही। इसी कारण नोटों का प्रचलन बंद होने के बाद हर जेब खाली हो गई। वह कहते हैं कि मोबाइल सेट खरीदने के लिए अब कोई नहीं आ रहा है। लोग जरूरत होने के बाद भी सेट खरीद पाने की स्थिति में नहीं है। गंभीर संकट की स्थिति आ गई है।