डीडीहाट में आपदा के बाद नहीं सुधरी रास्तों की हालत
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एक जुलाई को आई आपदा के पांच माह बाद भी डीडीहाट तहसील के हालात जस के तस हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में पेयजल लाइनों की मरम्मत नहीं हो पाई है। टूटे पैदल रास्तों को ठीक करने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लोगों को इस कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डीडीहाट तहसील को इस बार आपदा से भारी नुकसान हुआ था। दर्जनों गांवों की पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं और गांवों को जाने वाले सभी पैदल रास्ते मलबे में तब्दील हो गए थे। उस दौरान सभी दलों के नेताओं ने जल्द आपदा से निपटने के दावे किए थे, लेकिन पांच माह बाद भी लोग आपदा से टूटे रास्तों पर ही चलने को मजबूर हैं। ढुंगेती गांव के बच्चे, अध्यापक एवं ग्रामीण आज भी जान जोखिम में डालकर स्कूल और गांव को आ-जा रहे हैं। वहीं भड़गांव के कई हेक्टेयर खेती योग्य भूमि मलबे और पत्थरों से पटी है।
भड़गांव के लोकेश भड़ ने कहा कि जहां उनके गांव में धान और गेहूं की पर्याप्त फसल होती थी, वहां आज पत्थरों का ढेर लगा है। वहीं थल से डीडीहाट और डीडीहाट-ओगला मोटर मार्ग आपदा से बुरी तरह से टूट गया था, लेकिन आपदा मद में पांच माह बाद भी पैसा नहीं मिलने से लोग टूटी सड़कों पर ही चल रहे वाहनों में यात्रा को मजबूर हैं। डीडीहाट विकास संघर्ष समिति के संरक्षक डीएस पांगती ने कहा कि सरकार शीघ्र टूटी सड़कों और पेयजल योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था करे। इधर, जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस और लोनिवि के ईई पीसी जोशी ने बताया कि आपदा मद से अभी धनराशि नहीं आई है। प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं।