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आब न रून दिन हो यो गुण-बानर

Tue, 04 Oct 2016 10:39 PM IST
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट
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घरों के आसपास मंडरा रहे बंदर - फोटो : अमर उजाला
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समस्यानक अंबार, सुविधानक अभाव पहाड़ाक गौन बटि पलायन करूण लागी रो। आब तौ जंगली जानवर पहाड़ाक लौगन गौन बटि भजून बैठि गई। दिन में बानर, रात में सुअर खेति उजाड़ि दीनी। नेता, सरकार, प्रशासन अनजान बणि रई। जाणि इन लोगनाक आंख बुजी रई। यास हालतन में को रौलो इन गौन में बताओ धै हो महाराज।
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पैली कूंछी कि अलग पहाड़ि राज्य बनाओ, तब पहाड़ाक भलाक लिजि नीति बणलि। अपण लोग सरकार चलाल, पहाड़ बटि पलायन रुकौल। राज्य बणि बाद चौथ विधानसभा चुनाव हुणी छन। हर चुनाव में नेता चाहे उ कै दलौक ले हो, पहाड़ बटि पलायन रोकुन, पहाड़ में उद्योग लगून। जंगली जानवर बटि निजात दिलून आदि-आदि भाषणनलि कान पका दीनी लेकिन चुनाव बीति बाद क्वे ये विषय में बोलन तक नै। अस्कोट इलाक में गुण (लंगूर), बानर और सुअरनक आतंकलि लोगनलि खेतिबाड़ि छाड़ि हालि। दिन में बानर तो रात में सुअर खेति चौपट करि दीनी। 

अस्कोटाक देवल, रसगाड़ी, खोलियागांव, गर्खा, भागीचौरा, तल्लाबगड़ क्षेत्र में बानर, सुअरनक आतंकलि लोग खेति बटि दूर हुण लागि रई। खेति छुटि तौ रोजगार छुटि। ये कारणलि लोग अपण जन्मभूमि बटि पलायन करण लागि रई। जंगली जानवरनक योस आतंक छ कि लोगनलि येक लिजी कृषि रक्षा समिति नामलि एक समिति ले गठन करि हालौ। समितिक अध्यक्ष कृष्णानंद अवस्थी कूनन कि कई बार बंदर बाड़ा बणूना लिजी, सुअरन मारणाक लिजी मुख्यमंत्री थैं मुलाकात करि हालि। के उपाय न है सकि। जानवरनाक आतंकाक कारणलि लोग पलायन करण लागि रई। योस लागूं कि  सरकार, नेता, प्रशासन और वन विभाग बानर, सुअरनाक सामणि असहाय है ग्यान। यो जंगली जानवर पहाड़ बटि मैसनकैं भजै बेर छाड़ाल।
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बधियाकरण आदेश नै पुजि : रेंजर
वन रेंजर केआर टम्टा कूनन कि बानरनक बधियाकरणक फैसाल सरकारलि ली राखौ। आदेश आजि नै पुजि। कसिकै बधियाकरण हुण छू, यो लै पत्त निहाति। आदेशाक हिसाबलि काम हौलो।
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