पिथौरागढ़। चीन सीमा और आदि कैलाश को जोड़ने वाली पिथौरागढ़-लिपुलेख सड़क पर अब सफर आसान और सुरक्षित होगा। केंद्रीय सड़क मंत्रालय ने 285 करोड़ रुपये की योजना को हरी झंडी दी है जिससे दरकते पहाड़ों का ट्रीटमेंट किया जाएगा। इस पहल से आदि कैलाश यात्रियों, सैनिकों और स्थानीय लोगों की आवाजाही सुरक्षित होगी।
यह सड़क सामरिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। पिथौरागढ़-लिपुलेख सड़क चीन सीमा तक पहुंच प्रदान करती है। यह आदि कैलाश और मानसरोवर यात्रियों के लिए मुख्य मार्ग भी है। मलघाट और कुलागाड़ सहित चार स्थानों पर अक्सर पहाड़ी दरकने से सड़क बंद हो जाती है। इससे आदि कैलाश यात्रा बाधित होती है और सीमा पर तैनात सैनिकों को भी परेशानी होती है। यात्री, सैनिक और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। इस योजना के तहत सड़क पर बने खतरनाक क्षेत्रों का ट्रीटमेंट किया जाएगा।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सड़क बेहतर होने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। आदि कैलाश को हाल के वर्षों में नई पहचान मिली है जहां श्रद्धालुओं की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है। इस साल अब तक 60 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश पहुंच चुके हैं। सड़क बंद होने के कारण अक्सर यात्रा रोकनी पड़ती है जिससे श्रद्धालुओं को असुविधा होती है। सुरक्षित सड़क से श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी जिससे जिले का पर्यटन बढ़ेगा।
पिथौरागढ़-लिपुलेख सड़क के साथ ही टनकपुर-पिथौरागढ़ ऑलवेदर रोड पर बने डेंजर जोनों का ट्रीटमेंट कर इन सड़कों पर आवाजाही सुरक्षित बनाई जाएगी। इन योजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। सरकार प्रदेश की सड़कों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए गंभीर है।
-अजय टम्टा, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्य मंत्री