अधूरी हालत में पड़ी तालेश्वर सड़क
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टनकपुर-जौलजीबी सड़क के चार किलोमीटर हिस्से का काम पिछले 6 माह से बंद पड़ा है। इस कारण सड़क बनने की आस लगाए बैठे कई गांवों के लोगों में मायूसी है।
1993 में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में स्वीकृत यह सड़क जौलजीबी से डौड़ा तक 18 किमी और झूलाघाट से तालेश्वर तक 7 किमी पहले ही बन चुकी थी, लेकिन नेपाल सीमा पर महाकाली नदी के किनारे तालेश्वर के आगे चार किमी सड़क का हिस्सा शेष रह गया था। इस पर एक साल पहले कांग्रेस के प्रदेश सचिव प्रदीप पाल ने देहरादून जाकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सम्मुख सड़क के मामले को रखा था। तब जाकर बचे हुए इस सड़क का काम शुरू हुआ, लेकिन काम शुरू होते ही करीब छह माह पहले तालेश्वर से आगे सड़क की कटिंग के दौरान पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आने से ठेकेदार की मौत हो गई। तब से अब तक सड़क का काम रुका है। इस कारण महाकाली नदी के किनारे के गेठिगाड़ा, तालेश्वर, डौड़ा, अमतड़ी, तीतरी, बगड़ीगांव, रणुवा और बगड़ीहाट गांव के लोगों में निराशा है।
झूलाघाट से तालेश्वर तक इस समय सड़क पर डामर बिछाने का काम विश्व बैंक के सहयोग से चल रहा है। सड़क का काम कर रही अनुपम कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर लोकेश शर्मा ने बताया कि एक महीने में सड़क पर डामरीकरण का काम पूरा हो जाएगा। वहीं, इस सड़क को बनाने का काम लोक निर्माण विभाग के अस्कोट डिवीजन के पास है। विभाग के अधिशासी अभियंता आनंद बल्लभ कांडपाल ने बताया कि सड़क के दोबारा टेंडर के आदेश हो गए हैं। दो महीने बाद सड़क का काम शुरू हो जाएगा। जून 2018 तक सड़क की कटिंग का काम पूरा हो जाएगा। तालेश्वर के पास 30 मीटर लंबे पुल का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है।