गणाईगंगोली (पिथौरागढ़)। धपना और गोदीगाड़ होते हुए गणाई से खिरमांडे के लिए स्वीकृत सड़क 13 साल बाद भी नहीं बन पाई है। आज भी यहां के लोग चार से दस किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते हैं। बीमार और गर्भवती महिलाओं को डोली में बैठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। अधिकतर गांवों में तो पलायन होने के कारण अब डोली को कंधा देने के लिए भी लोग नहीं जुट पाते हैं।
खिरमांडे के लिए वर्तमान में गंगोलीहाट से सड़क है। 15 गांवों को जोड़ने के लिए गणाईगंगोली से खिरमांडे के लिए वर्ष 2007 में सड़क को शासन से स्वीकृति मिली थी। गोदीगाड़-धपना होते हुए इस सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। वन भूमि का मामला नहीं सुलझने से सड़क काटने का काम शुरू नहीं हुआ है। इसके चलते लोगों में शासन प्रशासन के खिलाफ नाराजगी है। ग्रामीणों को जरूरी सामान भी खिरमांडे या फिर गणाई से ढोना पड़ता है।
75 साल की उम्र हो चुकी है। आज भी सड़क मेरे लिए सपना ही है। पैदल रास्ते से खड़ी चढ़ाई पार कर तहसील मुख्यालय तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। इस बार 13 माह बाद पेंशन लेने जा पाई हूं। - सरुली देवी, धपना।
सड़क स्वीकृत हुए डेढ़ दशक होने वाला है। सड़क न बनना क्षेत्र की 15 हजार की आबादी के साथ धोखा है। सरकार को शीघ्र सड़क निर्माण करना चाहिए। यदि सड़क नहीं बनती है तो आंदोलन किया जाएगा। - लाल सिंह, ठंडा पानी।
खिरमांडे के लिए वर्ष 2007 में सड़क स्वीकृत हो गई थी। 13 वर्ष बीतने के बाद भी क्षेत्र की जनता पैदल चलने के लिए मजबूर है। यदि गांवों तक सड़क ही नहीं बनेगी तो क्षेत्र का कैसे विकास होगा। - भरत सिंह डोबाल, धपना।
सड़क नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी किसी के बीमार होने पर होती है। उन्हें डोली में सड़क तक ले जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को सड़क तक सुरक्षित पहुंचाने में भी काफी परेशानी होती है। - रेवती देवी, धपना।
सड़क बनती तो इन गांवों को मिलती सुविधा
गोदीगाड़, धपना, फलरों, वज्यूड़ा, नैनी, ठंडपानी, खतड़ा
--
युद्ध वीरों का क्षेत्र है
जो क्षेत्र सड़क से नहीं जुड़ पाए वहां के तीन सैनिकों ने 1962 और 1971 के युद्ध में शहादत थी। क्षेत्र के ठंडपानी निवासी बहादुर सिंह और फालरो निवासी मोहन सिंह ने 1962 में शहादत दी। वहीं बालाजांगर गांव निवासी भीम सिंह 1971 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
गणाई-खिरमांडे सड़क में भारत सरकार से आपत्ति आई थी। आपत्ति का निराकरण कर भारत सरकार को भेज दिया गया है। जल्द ही सड़क बनेगी। - मीना गंगोला, विधायक गंगोलीहाट।