केंद्र सरकार ने निर्मल ग्राम पुरस्कार योजना बंद कर दी है। पहले जिलों से निर्मल ग्राम का चयन होता था और केंद्र सरकार ऐसे गांवों को पुरस्कृत करती थी। अब राज्य स्तर पर स्वच्छता के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। स्वच्छता पुरस्कार के लिए पहला मानक खुले में शौच की प्रथा का पूरी तरह बंद करना शामिल है। यानि कि ऐसे गांव में शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण होना जरूरी है। यदि किसी गांव के एक तोक यानि कि आठ दस परिवारों वाले गांव में भी स्वच्छता का यह मानक पूरा होगा तो उसे स्वच्छ बसावट का पुरस्कार दिया जाएगा।
स्वजल परियोजना की ओर से ऐसे गांवों के प्रस्ताव मांगने शुरू कर दिए हैं जहां पर खुले में शौच की प्रथा बंद हो चुकी है। यह प्रस्ताव ग्राम पंचायत के स्तर से ब्लाक कार्यालय के पास आएंगे। वहां से इनको सीडीओ के पास भेजा जाएगा। सीडीओ के स्तर से गांव का मूल्यांकन करने के लिए पांच सदस्यों की टीम बनाई जाएगी। इसमें जिला विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, स्वजल परियोजना के प्रबंधक, जल निगम और जल संस्थान के इंजीनियर शामिल होंगे। ऐसे गांवों को ब्लाक स्तर पर क्षेत्र पंचायत समितियों की बैठक में सम्मानित किया जाएगा। जिला स्तर पर सीडीओ सम्मानित करेंगे और राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री ऐसे गांवों को 50 हजार रुपये की नकद राशि का पुरस्कार देंगे।
स्वजल परियोजना के प्रबंधक दीप चंद्र पुनेठा ने बताया कि स्वच्छता के प्रति लोग प्रेरित हों, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ग्राम पुरस्कार में जिले के कितने भी गांव शामिल हो सकते हैं। सिर्फ इन गांवों में स्वच्छता का मानक पूरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ जिले में हाल के दिनों में सफाई के प्रति चेतना का विकास हुआ है और कई गांवों में खुले में शौच की प्रथा पूरी तरह बंद हो चुकी है। श्री पुनेठा ने बताया कि अब नए सिरे से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि जिले में कितने गांव स्वच्छता के मानकों में खरे साबित हुए हैं।