मुनस्यारी और मदकोट में बारिश का कहर जारी है। मुनस्यारी के जैंती में एक घराट (पनचक्की) बह गया। इससे पांच किलोवॉट बिजली का उत्पादन होता था। धारचूला के गलाती में पांच मकान बह गए हैं। मुनस्यारी में खतरे की जद में आए कई परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट कर दिया है।
जैंती में नाला उफान में आने से मंगलवार को पुष्कर सिंह का घराट (पनचक्की) बह गया। घराट में उरेडा के सहयोग से 5 किलोवॉट का बिजली संयंत्र लगा था, जिससे बिजली उत्पादन होता था। जैंती में भीम सिंह पांगती, चंद्र सिंह पांगती के मकान को खतरा होने से उन्हें अन्यत्र शिफ्ट किया गया है। रीठा, तल्ला हरकोट, मटेना, मालूपाती के 14 मकान खतरे की जद में आ गए हैं। ग्राम प्रधान खुशाल सिंह जेष्ठा ने कंट्रोल रूम को मकानों के खतरे में आने की सूचना दी है। मालूपाती के कल्याण सिंह, मटेना के कुंदन राम और माधो राम के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मालूपाती के आपदा प्रभावितों को प्राथमिक पाठशाला और भराड़ी मंदिर के धर्मशाला में शिफ्ट किया गया है।
तल्ला हरकोट के चार परिवारों का संयुक्त मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। चौना के छह परिवारों को प्राथमिक पाठशाला में शिफ्ट किया गया है। सेरा, सुरईधार, सेविला के तीन परिवार को पंचायत घर सेविला में, पापड़ी के चार परिवार वहां के पंचायत घर में शिफ्ट किया गया है। रांथी की केशरी देवी का मकान खतरे की जद में आ गया है। धारचूला से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार को गलाती नाले के उफान में आने से केदार जेठा, कल्याण जेठा, विशन जेठा, गोविंद जेठा, मंगल सिंह और गगन सिंह के मकान बह गए। इसके अलावा मंगल सिंह, कमान सिंह और पुष्कर दानू के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं
बौलायर धार में फंसे 50 लोग धारचूला पहुंचे
धारचूला। नजंग के पास बौलायर धार में फंसे 50 लोग सुरक्षित धारचूला पहुंच गए हैं। नजंग का पैदल पुल बहने से यह लोग वहां फंसे हुए थे। इनमें चार छोटा कैलाश और दो कैलाश मानसरोवर गए पहले दल के यात्री भी शामिल हैं। बौलायर से लौटे अमर सिंह ने बताया कि वह लोग जान जोखिम में डालकर धारचूला पहुंचे हैं। उन्हें किसी प्रकार की सरकारी मदद नहीं मिली। वह लोग काफी कष्ट उठाकर धारचूला पहुंचे हैं। उधर, उपजिलाधिकारी आरके पांडेय का कहना है कि एसडीआरएफ और पुलिस की टीम को इन लोगों की मदद के
लिए भेजा गया था।
नारकी के तीन परिवारों ने जंगल में बिताई रात
मदकोट। मदकोट क्षेत्र के नारकी गांव के तीन परिवारों ने मकान खतरे की जद में आने के कारण एक रात जंगल में बितानी पड़ी। मदकोट से चार किमी दूर नारकी गांव में दो जुलाई की रात बारिश के बीच भूस्खलन होने लगा। इससे गांव निवासी बहादुर सिंह (72), सुपली देवी (65) गोकर्ण सिंह (45), रंजीत सिंह (44), अंबिका देवी (38) गोविंदी देवी (39) रात के नौै बजे घरों को छोड़कर जंगल को चले गए। इन लोगों ने सोमवार की रात गाखुली के जंगल में छाता ओढ़कर बिताई। मंगलवार की शाम यह लोग यहां से सात किमी का पैदल सफर तय कर मदकोट पहुंचे। इनमें से बुजुर्ग बहादुर सिंह की तबियत खराब हो गई है। बहादुर सिंह और उनकी पत्नी ने मदकोट में शरण ले रखी है। अन्य लोगों ने वैगा प्राथमिक स्कूल में रह रहे हैं। एक रात जंगल में बिताने के बाद लौटे यह लोग अब भी सहमे हुए हैं। प्रभावितों ने बताया कि गांव नहीं छोड़ते तो उनकी जान भी जा सकती थी। मकान रहने लायक नहीं रह गए हैं। गांव को जाने के लिए रास्ते नहीं बचे हैं। उन्होंने शासन से गांव की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता से कदम उठाने, गांव के रास्तों को ठीक करने, उनके मकानों की मरम्मत करने, उन्हें आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई है।
प्रभावितों को दी सहायता राशि
मुनस्यारी। मकानों को काफी नुकसान पहुंचने पर प्रशासन ने नानासेम निवासी मोहन सिंह निखुर्फा को 45000, गुमसैन की कमला देवी को 48000 रुपये की आर्थिक मदद दी है। मंगलवार को 18 लोगों को 3800-3800 रुपये की सहायता राशि बांटी गई थी। एसडीएम केएन गोस्वामी ने आपदा प्रभावितों को राहत सामग्री का वितरण किया। एसडीएम ने बताया कि प्रभावितों की सूची तैयार की जा रही है, सभी को राहत राशि वितरित की जाएगी। उधर, नोडल अधिकारी एडीएम राम दत्त पालीवाल मुनस्यारी पहुंच गए हैं। उन्होंने राहत कार्यों का जायजा लिया। राजस्व कर्मियों को क्षति का आंकलन करने के निर्देश दिए।