पिथौरागढ़। सीमांत जिले के अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाओं के बाद भी गर्भवतियों को प्रसव के लिए हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। अस्पतालों में तैनात प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी स्थानीय स्तर पर प्रसव कराने से हाथ पीछे खींच रहे हैं और गर्भवतियां एंबुलेंस में बच्चा जनने के लिए मजबूर हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते एक साल में 55 गर्भवतियों का एंबुलेंस में सड़क किनारे प्रसव हुआ जबकि 425 गर्भवतियां सरकारी अस्पतालों से हायर सेंटर रेफर हुईं।
जिले के महिला अस्पताल सहित डीडीहाट, धारचूला, गंगोलीहाट, बेरीनाग और मुनस्यारी सीएचसी व कनालीछीना, गोचर, गणाई गंगोली और मुवानी पीएचसी में प्रसव के लिए स्टाफ नर्स और जरूरी उपकरण मौजूद हैं। इसके बावजूद, प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवतियों को गंभीर स्थिति बताकर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है।
आपातकालीन सेवा 108 से मिले आंकड़ों के अनुसार, रोजाना इन अस्पतालों से औसतन तीन से चार गर्भवतियों का प्रसव कराने से हाथ पीछे खींचते हुए उन्हें हायर सेंटर रेफर कर जच्चा-बच्चा की जान खतरे में डाली जा रही है।
जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मियों की ना से ये गर्भवतियां प्रसव के लिए 20 से 130 किलोमीटर का लंबा सफर कर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए मजबूर हैं। इनमें से कई गर्भवतियों का 108 कर्मी एंबुलेंस को सड़क किनारे खड़ा कर सुरक्षित प्रसव करा रहे हैं। ये आंकड़े सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों की हकीकत भी बयां कर रहे हैं।
108 कर्मी अपनी सूझ-बूझ से एंबुलेंस में करा रहे हैं प्रसव
सीमांत जिले में संस्थागत प्रसव कराने के दावे तो खूब हो रहे हैं जो धरातल पर बेअसर हैं। जिले के मुनस्यारी, गंगोलीहाट सीएचसी और कनालीछीना पीएचसी से सबसे अधिक गर्भवतियां हायर सेंटर रेफर हो रही हैं। चिंता की बात यह है कि इन अस्पतालों में तैनात प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी गर्भवतियों का प्रसव कराने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। वहीं 108 कर्मी कई गर्भवतियों का एंबुलेंस में सुरक्षित प्रसव कराकर व्यवस्था को आईना दिखा रहे हैं।
अधिकांश पीएचसी और सीएचसी में प्रसव की सुविधाएं और पर्याप्त स्टाफ है। सभी को स्थानीय स्तर पर गर्भवतियों का प्रसव कराने के निर्देश दिए गए हैं यदि ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। गंभीर मामलों में ही गर्भवतियों को रेफर किया जाना चाहिए। हर सीएचसी और पीएचसी में रेफर केसों की हिस्ट्री खंगाली जाएगी।
-डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़