पिथौरागढ़। धारचूला के दुर्गम गांवों में जान जोखिम में डालकर गधेरे पार कर रहे ग्रामीणों की सुध आखिरकार प्रशासन ने ले ली है। फिलम और कोकलखेत में आपदा से क्षतिग्रस्त हुई गरारियों के सुधारीकरण के लिए तीन लाख रुपये का बजट जारी हो गया है। लोक निर्माण विभाग इनकी मरम्मत करेगा जिससे इससे क्षेत्र के छह से गांवों के ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।
धारचूला में फिलम और दुग्तू, कोकलखेत, सेला, चल, तेदांग के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए लगी गरारीं आपदा से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इन गांवों के लोग जोखिम उठाकर गधेरों, नालों से आवाजाही करने के लिए मजबूर है। जल्द ही इन गरारी का सुधारीकरण किया जाएगा। फिलम में लगी गरारी के सुधारीकरण में दो लाख रुपये, कोकलखेत में लगी गरारी के सुधारीकरण में एक लाख रुपये खर्च होंगे। लोनिवि को इसके लिए धनराशि मिली है। इन गरारियों की रस्सी बदली जाएगी तो इनमें ग्रीसिंग भी होगी।
लकड़ी के तीन पुल बहने से बढ़ गई मुश्किल
आपदा के दौरान न केवल गरारियां खराब हुई थीं बल्कि आवाजाही के लिए गधेरों और नालों पर बने तीन लकड़ी के पैदल पुल भी बह गए थे। इसके चलते ग्रामीण और विद्यार्थी खराब गरारियों के सहारे या उफनते नालों के बीच से आवाजाही करने के लिए मजबूर थे। अब गरारियों के दुरुस्त होने से यह खतरा कम हो जाएगा।
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फिलम और कोकलखेत में गरारियों के सुधारीकरण के लिए धनराशि मिल चुकी है। ग्रामीणों की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाना हमारी प्राथमिकता है और जल्द ही मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - आशीष लुंठी, सहायक अभियंता, लोनिव, अस्कोट