लखनपुर में बने लकड़ी के पुल से नजंग की ओर जाते एसडीएम
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माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में गए ग्रामीणों के लिए हेलीकॉप्टर से भेजा गया राशन वहां परिवारों के हिसाब से नाकाफी है। सीमांत के लोगों ने सरकार पर महज खानापूर्ति करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता ने इस उपेक्षा के खिलाफ फिर से कोर्ट की शरण में जाने की चेतावनी दी है।
माइग्रेशन पर गए एक हजार से अधिक लोग व्यास घाटी के गांवों में फंसे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र बुदियाल की याचिका पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने 14 अक्तूबर को हेलीकॉप्टर से राशन भेजा था। इसके बाद हेलीकॉप्टर नहीं आया, जो राशन गांवों में भेजा गया है, वह आबादी के हिसाब से बहुत कम था। इसके चलते सस्ता गल्ला विक्रेता भी असमंजस के कारण राशन नहीं बांट सके। खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए प्रशासन ने धारचूला बाजार के दाम के आधार पर राशन एवं अन्य सामान बेचने के निर्देश दिए थे। इसके बाद राशन का वितरण शुरू हुआ।
गुंजी में पहुंचाया गया राशन गुंजी के अलावा नाभि, रांगकांग और नपलच्यू के ग्रामीणों में बांटा जाना है, जो सामान वहां भेजा गया था, उसे सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने बिक्री कर दिया है, जबकि अभी कई परिवारों को राशन नहीं मिला है। याचिकाकर्ता महेंद्र बुदियाल का कहना है कि सातों गांवों में खाद्यान्न की स्थिति की जानकारी एकत्र कर रहे हैं। कोर्ट के निर्देश के बाद भी शासन की ओर से खानापूर्ति की गई है। कहा कि यदि फिर से जरूरत का राशन नहीं भेजा गया तो इसके खिलाफ कोर्ट में जाएंगे।
नजंग पुल देखने गए एसडीएम
धारचूला। भारत और नेपाल को जोड़ने वाले नजंग पुल का तेजी से निर्माण हो रहा है। लकड़ी के लट्ठों से बनाए जा रहे इस पुल से माइग्रेशन पर गए लोगों के साथ ही घोड़े और भेड़ों को भी वापस लाया जाना है। तहसील प्रशासन इस पुल के निर्माण पर लगातार नजर रखे है। एसडीएम आरके पांडेय ने शुक्रवार को भी नजंग पहुंचकर पुल निर्माण के कार्य को देखा। उन्होंने बताया कि शनिवार तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा।