थल (पिथौरागढ़)। जैव विविधता लिए उत्तराखंड कई दुर्लभ जीवों का घर है। थल के गर्जिला गांव के जंगल में दो दिन पहले हिमालयन लाल गिलहरी का एक जोड़ा देखा गया। यह साधारण गिलहरी से बड़ी है। यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ में आसानी से उड़ते हुए जाती है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाले खूबसूरत दुर्लभ प्रजाति की यह गिलहरी आमतौर पर रात को शिकार की तलाश में निकलती है। यह अपनी त्वचा को सिकोड़कर उड़ती है। ये अपने पंजों में लगे रोएं को पैराशूट की तरह बनाकर इसे उड़ने के लिए प्रयोग करती है।
इसके अगले और पिछले पंजे खाल से जुड़ी रहते हैं। जब ये हवा में होती हैं तो ये अपने दोनों पंजों को खोल लेती हैं, जिससे ये हवा में आसानी से उड़ सकती है। सच तो यह हैं कि यह उड़ती नहीं हैं बल्कि हवा में ग्लायड कर एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक जाती है।
इसका प्राकृतिक वास नष्ट होने तथा शिकार होने के कारण इसकी संख्या लगातार कम हो रही है। थल के रहने वाले छवि पाठक ने दो दिन पहले अपने ही बगीचे के जंगल में देखा था। ये अब भी कभी कभी रात के समय में दिख रहा है। इस तरह के दुर्लभ प्रजाति के गिलहरी के मिलने से थल क्षेत्र के लोगों में कौतूहल है।