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रणुवा गांव तक दौड़ने लगे वाहन

Thu, 07 Jan 2016 10:08 PM IST
केबी पाल/अमर उजाला, अस्कोट/पिथौरागढ़।
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अस्कोट-टनकपुर के बीच की करीब 200 किमी की दूरी को कम करने और महाकाली नदी से लगे लोहाघाट और चंपावत के घाटी वाले इलाकों की आबादी की सहूलियत के लिए बन रही सड़क पर 21 वर्ष बाद ही सही पर कुछ काम आगे बढ़ा है। वर्ष 2000 तक बनी करीब 16 किमी सड़क पर यातायात चल रहा था।
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वहीं दूसरी ओर इस रूट के बीच में पिथौरागढ़ लोनिवि ने झूलाघाट से तामेश्वर तक करीब पांच किमी सड़क पहले ही काट दी थी, लेकिन कठोर चट्टान के कारण कार्य रुका हुआ था।

इस चट्टान को काटकर दो किमी सड़क बनाने के साथ ही टनकपुर-झूलाघाट-जौलजीबी रूट पर अब 23 किमी तक वाहनों का संचालन शुरू हो गया है। हालांकि, यह सड़क अभी कच्ची है। सड़क बनने से रणुवा, चकद्वारी, पचौली, गर्खतड़ी, तालेश्वर आदि गांवों की करीब 45,000 की आबादी यातायात से जुड़ गई है।
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वर्ष 1993 में तत्कालीन यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने महानदी से लगे घाटी वाले इलाकों के लोगों की सहूलियत के लिए टनकपुर-झूलाघाट-जौलजीबी मार्ग की घोषणा की थी। तब इस सड़क के लिए 90 करोड़ रुपये जारी हुए थे, जिसे लोनिवि के अस्कोट डिवीजन ने जौलजीबी से रणुवा तक 18 किमी सड़क का कटान किया था। वहीं दूसरी ओर से भी करीब पांच किमी सड़क काटी गई।

इस बीच में रणुवा के पास 500 मीटर कठोर चट्टान आने से कई ठेकेदारों ने काम छोड़ दिया। कई साल ऐसे ही गुजर गए। इसके बाद जुलाई 2015 में गुस्साए ग्रामीणों ने अस्कोट लोनिवि कार्यालय में तालाबंदी कर सड़क निर्माण की मांग की, जिस पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता पूरन चंद पंत ने तीन महीने में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था।

अगस्त में ठेकेदार गणेश चंद्र भट्ट ने 80 लाख रुपये में चट्टान काटने का टेंडर लिया। लोनिवि के अवर अभियंता ललित मोहन ने बताया कि सड़क में इस समय वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन सड़क में पार्ट टू का कार्य शेष है।

 अमतड़ी के प्रधान मान सिंह कार्की, दयोड़ा के नरेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान चंदन सिंह, खीम सिंह भंडारी, लक्ष्मण ऐरी, योगेंद्र पाल, जिला कांग्रेस प्रवक्ता ललित पाल आदि ने सड़क सुचारु करने के लिए लोनिवि का आभार जताया है।

सड़क से जुड़ी कुछ खास बातें
- वर्तमान रूट से अस्कोट से टनकपुर की दूरी 200 किमी है।
- टनकपुर-झूलाघाट-जौलजीबी सड़क बनने से यह दूरी 135 किमी रह जाएगी।
- सड़क बनने से समय और धन दोनों की ही बचत होगी।
- महाकाली नदी से लगे घाटी वाले इलाकों को होगा सबसे अधिक लाभ।

एलाइमेंट ने लटका दी टीजे रोड
चंपावत। टनकपुर-जौलजीवी (टीजे) मोटर मार्ग सांप-सीढ़ी के खेल की तर्ज पर उलझ गई है। राज्य बनने से पहले से शुरू इस रोड में काम करीब दो दशक बाद भी शुरू नहीं हो सका है। करीब दो साल पहले इस मोटर मार्ग की सभी अड़चनों को दूर कर लिया गया था। लेकिन केंद्र सरकार बदलने के बाद पंचेश्वर बांध पर तेज हुई हलचल ने इस रोड की गति पर ब्रेक लगा दिया है।

सामरिक महत्व की इस रोड को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय कई बार उच्च स्तरीय बैठक कर चुका है। अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेपाल दौरे से पंचेश्वर बांध में आई तेजी और बांध की 315 मीटर की ऊंचाई में बढ़ोतरी की संभावना से नया पेंच फंसा।

लोक निर्माण विभाग का कहना है कि बांध की ऊंचाई तय होने के बाद इस मोटर मार्ग के एलाइमेंट (समरेखन) को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। आमतौर पर रोड का मौजूदा एलाइमेंट काली नदी के समानांतर है। अलबत्ता इस वक्त मार्ग के शुरुआती बिंदु ककरालीगेट (टनकपुर) से ठुलीगाड़ के बीच के 12 किमी में रोड की चौड़ाई को बढ़ाने का काम चल रहा है।

 135 किमी लंबे मोटर मार्ग में 106.23 हेक्टेयर वन क्षेत्र के बदले रांथी, सोसा, रमतोली, पांगला और गलाती में 213 हेक्टेयर सिविल जमीन क्षतिपूरक पौधारोपण के लिए दी जा चुकी है। वैसे इस मार्ग का रुट टनकपुर से ठुलीगाड़, चूका, पंचेश्वर, झूलाघाट होते हुए जौलजीवी तक प्रस्तावित है।
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