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...रंगील सोर में मचि रे आठूंकि बहार

Mon, 29 Aug 2016 10:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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...रंगील सोर में मचि रे आठूंकि बहार - फोटो : अमर उजाला
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 अपण रंगीलो पहाड़ इन दिनान आठूं लोक पर्वकि मस्ती में डूबि र्योछ। रंगील सोर (पिथौरागढ़) में आठूं महोत्सवक बहांण संस्कृति संरक्षणक काम चलि रौ। अहा गौं-गौं बटि लोक संस्कृतिक संवाहक रामलीला मैदान में निहारै खेल (आठूं की एक विधा) लगूंनई। सबै गौंन में गौरा (माता पार्वती), महेश्वरैकि (भगवान शंकर) पुज हुणैं। तमाम इलाकन में आठूंकि निहारी रौनक छाजी रै हो। आवौ आपूं लोग लेक आठूंक आनंद लियो।
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जिला मुख्यालयाक रामलीला सदर मैदान में कई सालों बटि रामलीला प्रबंधकारिणी समिति आठूं महोत्सवक आयोजन करण लागी रै। समितिक यो प्रयास रंग लूनौ। गौं-गौं बटि आठूं दल महोत्सव में जुटी बेर आपणी कला बिखरनईं। विलुप्तिक कगार पहुंची र्यो यो हमर खेल। ठुल खेल, झ्वाड़, चांचरी, भगनौल, न्योली, छपेलिक स्वर फिर सुणन में उनईं। ओ ईजा कतुक भल मानीणौ, भौते निक लागणौ हो महाराज।

मैदान में जब हुड़ुुक, ढोल, दमूं, मशकबीनैकि संगत में ‘सिलगढ़ि का पाला चाला गिन खेलन्या गड़ो, ओ नंदी त्यार मैत को जोगि आ रौछ चिमटा चमाचम’ जास खेलनाक बोल सुणन में ऊंण लागी रैईं। वातावरण आठूंमय है जांणौ। महोत्सव में संस्कृति संरक्षणक काम करनेर लोग पुराण जमान में आई क्यू टेस्ट नापणि वाल काथ, क्वीण, ऐंण (पहेली) प्रतियोगिता करूनईं। सही उत्तर दिणी वालनकैं इनाम मिलंणौ। जन्नू दा और दीवान सिंह वल्दिया रोचक ढंगलि महोत्सवक संचालन करनई। अहा संस्कृतिक फुहार बरसन लागी रै। असल संस्कृति संरक्षणक दीदार हुण लागी रईं, ये में कोई शक न्हाती।
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पुरैंणि राजधानी ले मस्त छन
कत्यूरी राजनैकि अतीतैकि राजधानी अस्कोट, और गंगोलीहाट में ले लोग आठूंकि मस्ती में डूबी छन। अस्कोटाक देवल, खोलियागांव, हिनकोट, बगड़ीहाट, बेड़ा, गर्खा में आठूंकि धूम मचि रै। अस्कोटाक कई गौन में आठूंक समापन लै है गो। गंगोलीहाटक ले कई गौंन में आठूंकि बहार छा रै।

सैंणिनैलि सुंदर आठूंक मंचन करौ
 नाचनकि भैंसखाल में आठूं पर्व बिरुड़ा आठूंक नामैलि जांण्ीा जांछ। ये सालक आठूं त्यारक सोमवारक दिन समापन है गो। समापनकि बखत सैंणिनैलि सुंदर आठूंक मंचन करौै। अघिल साल फिर भेटुन बोलाक साथ लोग अपण-अपण घर हीं ल्है गईं। 
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