नाचनी में रामगंगा के किनारे लगे कूड़े के ढेर
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नामिक और हीरामणि ग्लेशियर से निकलने वाली रामगंगा अपने उद्गम से 50 किलोमीटर आगे तक तो निर्मल है लेकिन नाचनी से इसमें गंदगी समाने लगती है। नाचनी से आगे रामगंगा में कई जगह गंदगी गिरती रहती है। नाचनी कस्बा बागेश्वर जिले के कई गांवों का केंद्र स्थल है। करीब दो हजार की आबादी वाले इस कस्बे में रहने वाले सैकड़ों मजदूर रामगंगा किनारे ही शौच करते हैं। यहां घरों की गंदगी को भी सीधे नदी में ही छोड़ दिया जाता है।
बाजार और घरों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था न होने के कारण लोग कूड़े, कचरे को उठाकर नदी में छोड़ देते हैं। रामगंगा में नाचनी के पास ही भुजगड़ नदी भी मिलती है। इस संगम पर शवदाह भी किए जाते हैं। शवदाह वाले स्थान पर भी गंदगी और कूड़ा जमा रहता है।
रामगंगा की सफाई प्राकृतिक रूप से ही होती है। सालभर नदी के किनारे जमा रहने वाली गंदगी जून में नदी का प्रवाह बढ़ने के साथ ही यहां तो साफ हो जाती है लेकिन आगे जाकर यह दूसरी नदियों और अंतत: गंगा को प्रदूषित करती है। थल में तो रामगंगा घरों के कूड़े-कचरे से पूरी तरह पट जाती है। ग्लेशियर से निकलने वाली इस नदी की हालत आबादी वाले इलाकों में पहुंचने के साथ ही बेहद खराब हो जाती है।
सफाई के लिए कोई मद नहीं
बाजार कमेटी के पास सफाई के लिए कोई मद नहीं होती। कभी कभार अपने संसाधनों से यदि बाजार में सफाई अभियान चला भी दिया तो कूड़े का निस्तारण कर पाना संभव नहीं होता। बाजार कमेटी के अध्यक्ष कुंदन बथियाल का कहना है कि लोगों को सफाई के प्रति जागरूक किया जाता है और नदी में कूड़ा न डालने के लिए प्रेरित किया जाता है। नदी की सफाई के लिए अब तक यहां कोई अभियान नहीं चला है।