जल संरक्षण कार्यशाला में मौजूद अधिकारी और जनप्रतिनिधि
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पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि बरसाती पानी के संरक्षण के लिए चाल-खाल का निर्माण करें। साथ ही लोगों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अपनाने के लिए आगे आना होगा। पेयजल मंत्री ने कहा कि 25 मई को जल संरक्षण दिवस मनाया जाए।
पंत मंगलवार को यहां वन विभाग की ओर से आयोजित जायका वित्त पोषित चीड़ बहुल वन क्षेत्रों में एकीकृत जल संवर्धन और मिट्टी संरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पानी का संरक्षण आज सबसे पहले जरूरत है। संरक्षण की तकनीक न होने के कारण बरसाती जल बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि वन क्षेत्रों में चाल खाल बनाए जाएं तो पानी लंबे समय तक संरक्षित रहेगा और जमीन को नमी मिलती रहेगी। पेयजल को किसी भी दशा में बर्बाद न किया जाए। कुछ लोग वाहन धोने के लिए भी पेयजल का उपयोग करते हैं, यह गलत है। इस दौरान उन्होंने वन्य जीवों के हमले में घायल 15 लोगों को मुआवजे की राशि बांटी।
इससे पहले डीएफओ विनय भार्गव ने मंत्री का स्वागत किया और कार्यशाला का उद्देश्य समझाया। कहा कि वन विभाग चीड़ बहुल क्षेत्रों में पानी को बचाने की कार्ययोजना बना रहा है। चीड़ के जंगल पानी को ज्यादा सोखते हैं। कार्यशाला में सीडीओ आशीष चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र वल्दिया, जिला महामंत्री गोपू महर, कई सरपंच तथा अन्य लोग उपस्थित थे।
पंपों की मोटर बदलने को दो करोड़ मिले
पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि गुरना, मटेला, हनुमान मंदिर और घाट में पानी लिफ्ट करने के लिए लगी मोटरों को बदलने के लिए शासन ने दो करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। इस मद में अभी 2.83 करोड़ रुपये की और जरूरत है। इसकी भी तत्काल व्यवस्था होगी। यह मोटर 2011 से नहीं बदली गई हैं। मोटर खराब होने के कारण अक्सर पेयजल सप्लाई पर असर पड़ता है।