तल्लाजोहार में धान की मढ़ाई करती महिलाएं
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तीन दिन से लगातार जारी बारिश रविवार सुबह से थम गई और किसानों का रुख खेतों की ओर हो गया। लोग धान की फसल समेटने में जुट गए हैं। इस बार बेमौसम बारिश से धान की फसल के साथ-साथ पुआल के भी सड़ने का खतरा हो गया है। किसान इस बात से आशंकित हैं कि यदि फिर बारिश हुई तो धान की फसल चौपट हो जाएगी।
पहाड़ों पर धान मढ़ाई का विशेष तरीका होता है। पहले खेतों से धान के पौधों को काटकर एक जगह संग्रह किया जाता है। इसे कुन्यूड़ कहा जाता है। दो-तीन दिन कुन्यूड़ में रहने के बाद धान के दाने पुआल को छोड़ने लग जाते हैं और मढ़ाई में आसानी होती है। फिर धान की मढ़ाई के लिए कपड़ों की मदद से टेंट (ताड़ा) बनाया जाता है, ताकि मढ़ाई के समय धान के दाने इधर-उधर न बिखरें। इस काम को महिलाएं भी आसानी से कर लेती हैं। यदि मौसम सामान्य रहा तो धान की मढ़ाई के बाद पुआल को सुखाने में आसानी होती है और धान भी सही ढंग से सूख जाता है।
तल्लाजोहार के हुपली, बांसबगड़, भैंसकोट, चामी, सैणरांथी, होकरा, बिर्थी, बला, डोर, क्वीटी में इन दिनों किसान धान की फसल समेटने में जुटे हैं। पूरे इलाके में धान की फसल 300 हेक्टेयर में बोई गई है। हुपली के किसान गोविंद सिंह, रतन सिंह, शेर सिंह, बिर्थी के किसान महेंद्र सिंह, श्याम सिंह, गंगा सिंह आदि ने बताया कि अब तक बारिश से 20 फीसदी फसल खेतों में बर्बाद हो चुकी है। धान की पकी फसल को आंधी और बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है।
24 घंटे में कहां कितनी बारिश
पिथौरागढ़-10.5 एमएम
गंगोलीहाट-21.0 एमएम
बेड़ीनाग-17.0 एमएम
डीडीहाट-10.0 एमएम
धारचूला-13.0 एमएम
मुनस्यारी-25.0 एमएम