पिथौरागढ़ नगर की सड़कों पर बहता बरसाती पानी
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बारिश का पानी कहर बनकर टूट रहा है। सरकारी इंतजामात का ढोल तो खूब पीटा जाता है, लेकिन धरातल पर नजारा शून्य है। बारिश के पानी की निकासी के मामले में जिला मुख्यालय में ही हाल बेहाल हैं। बारिश का पानी सड़क पर बह रहा है। हालांकि, एक महीने पहले जिलाधिकारी निकास नालियों और बंद पड़े स्क्रबरों को खोलने के निर्देश दे चुके हैं।
पिथौरागढ़ में बृहस्पतिवार को बारिश का लगातार तीसरा दिन था। शहर की निकास नालियां बंद होने से बरसात का पानी सड़क पर बह रहा था। साथ में बहकर आ रहे पत्थर, कंकड़ वाहनों से टकराने के बाद दुकान, मकान में उछल रहे थे। जिला मुख्यालय का चंडाक मार्ग हो, बैंक मार्ग हो, सिल्थाम मार्ग हो या जीआईसी मार्ग अथवा धारचूला मार्ग हर जगह बरसाती पानी सड़कों पर बह रहा है। वर्ष 2014 में शहर की सड़कों के किनारे निकास नालियों के निर्माण में लोनिवि ने 6 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन कहीं पर भी मानक के अनुसार निकास नालियां नहीं बनाई गई। जो बनाई भी गई तो बंद पड़ी हैं। कई स्थानों पर निकास नालियों में पानी के पाइप पड़े हैं। वर्ष 2014 में लोनिवि ने जल संस्थान को निकास नालियों से पानी के पाइप शिफ्ट करने के लिए 24 लाख रुपये दिए, लेकिन पाइपों को शिफ्ट नहीं किया गया।
एक महीने पहले शहर के रई में कई घरों में बरसात का पानी घुस गया था। तब जिलाधिकारी सी रविशंकर ने इलाके का भ्रमण कर बंद पड़े स्क्रबरों और निकास नालियों को खोलने और निकास नालियों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश संबंधित महकमों को दिए थे लेकिन इन महकमों पर कोई असर नहीं हुआ।
यह भी हैं बाधाएं
पिथौरागढ़। इस शहर में निर्माण सामग्री से सड़कों को बाधित करना आम बात है। शहर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और महिला आईटीआई के पास के इस नजारे को ही देख लीजिये, सड़क पर पत्थर और रेत के ढेर पड़े हैं। बरसात में बहते रेत में वाहन रपट रहे हैं। रात के अंधेरे में लोग पत्थरों से टकरा रहे हैं। यह सामग्री तीन दिन से सड़क पर पड़ी है। आधे से अधिक सड़क पत्थरों से पटी है, इससे यातायात संचालन में दिक्कत होती है। ऐसा नजारा इस शहर की सभी सड़कों में दिखाई देता है। टिप्परों से एक साथ सड़क पर पत्थरों का ढेर फेंका जाता है, इससे सड़क को भी नुकसान पहुंचता है। एक महीने पहले जब शहर में सीपीयू का गठन पुलिस महकमे ने किया तो इस तरह की दिक्कतों को भी हल करने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन सीपीयू भी सड़क को बाधित करने वाले तत्वों से निपट नहीं पा रही है।