चारा उत्पादन की जानकारी लेती महिलाएं
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तल्लाजोहार (नाचनी) की तीन गांवों की महिलाओं ने बंदरों के आतंक से परेशान होकर दुग्ध उत्पादन को व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया है। हिमोत्थान परियोजना के तहत महिला समूह 18 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चारा पैदा कर रही हैं।
बृहस्पतिवार को खंड विकास अधिकारी श्याम चंद ने अन्य अधिकारियों के साथ हिमालयन ग्राम विकास समिति गंगोलीहाट द्वारा भैंसखाल में संचालित चारा विकास के कामों का निरीक्षण किया। भैंसखाल में 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में चारा घास उगाई जा रही है। गांव के 24 परिवारों की महिलाओं ने अपनी नाप जमीन में चारा पौधे लगाए हैं। कोट्यूड़ा में 10 हेक्टेयर, तल्ला भैंसकोट में 3 हेक्टेयर क्षेत्र में औस घास, भीमल, क्वेराल के पौधों का रोपण किया है। औस घास सदाबहार होती है, इसे पानी की भी कम जरूरत पड़ती है। चारा विकास क्षेत्रों में 75 प्रतिशत औस घास उगाई जा रही है। भैंसखाल में ऐड़ी और सरस्वती महिला समूह चारा घास का उत्पादन कर रहा है।
महिलाओं का कहना है कि दुग्ध व्यवसाय से आजीविका में सुधार लाया जाएगा। बीडीओ ने महिलाओं को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान संस्था के जगत दशौनी, प्रधान चंद्र कला दानू, उप प्रधान अनीता देवी, अपर अवर अभियंता केएस लसपाल, ग्राम विकास अधिकारी केएसएस खड़ायत, मनरेगा सहायक किशन राम आदि साथ थे।