पिथौरागढ़। सीबीएसई हाईस्कूल की बोर्ड के परीक्षाफल ने सरकारी शिक्षा की हकीकत उजागर की है। जहां निजी विद्यालय बेहतर परीक्षाफल देने की परीक्षा में अव्वल रहे हैं तो इसमें सरकारी स्कूल पिछड़े हैं। तमान संसाधनों, प्रशिक्षित शिक्षकों की तैनाती के बाद भी सीबीएसई के तहत उत्कृष्ट विद्यालयों के नाम पर संचालित सरकारी स्कूलों में सिर्फ 67 फीसदी विद्याथियों ने ही सफलता हासिल की है। वहीं निजी स्कूलों में परीक्षाफल 95 फीसदी से अधिक रहा है।
सीमांत जिले में सीबीएसई के तहत 16 इंटर कॉलेज संचालित हैं इन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों का दर्जा दिया गया है। ये विद्यालय नाम के मुताबिक बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में निजी स्कूलों के मुकाबले पिछड़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस बार जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 2200 विद्यार्थियों ने हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा दी। जिले में सीबीएसई के तहत संचालित 16 सरकारी स्कूलों के 549 विद्यार्थी हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए। इसके सापेक्ष सिर्फ 381 यानि 67 फीसदी विद्यार्थियों को ही सफलता मिली है। हालांकि 142 परीक्षार्थियों की कंपाटमैंट आई है यानि वे एक विषय में असफल हैं और उन्हें सफल होने का एक मौका मिलेगा। 26 विद्यार्थी फेल हुए हैं। वहीं निजी स्कूलों में 1641 विद्यार्थियों के सापेक्ष 95 फीसदी ने बोर्ड परीक्षा में सफलता हासिल की है। आंकड़ों से साफ है कि निजी विद्यालयों की अपेक्षा सरकारी स्कूल बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम देने से चूके हैं।
बेटियों ने लहराया है परचम
पिथौरागढ़। सरकारी स्कूलों में बेटों की अपेक्षा बेटियों ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी स्कूलों के 321 छात्रों जबकि 228 छात्राओं ने परीक्षा दी। 215 छात्र तो 166 छात्राएं सफल रही हैं। यानि 67 प्रतिशत छात्र जबकि 73 प्रतिशत छात्राओं को सफलता मिली है। आंकड़ों से साफ है कि बेटियों ने बेटों की अपेक्षा अपने ज्ञान का लोहा मनवाकर महिला सशक्तीकरण और बेटी पढ़ाओ को सार्थक किया है। संवाद
सबसे दूर के सरकारी स्कूल में परीक्षाफल सबसे बेहतर
पिथौरागढ़। मुनस्यारी जिले का सबसे दूरस्थ विकासखंड है। इसके बाद भी सीमित संसाधनों और विषम भौगोलिक हालातों के बीच संचालित इस स्कूल ने अन्य सरकारी विद्यालयों की अपेक्षा सबसे बेहतर परीक्षाफल दिया है। इस स्कूल का परीक्षाफल 94.24 प्रतिशत है। इस स्कूल के 52 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 49 सफल रहे हैं। वहीं बेड़ीनाग विकासखंड के जाबुकाथल इंटर कॉलेज में परीक्षाफल सबसे खराब रहा है। यहां 15 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए और सिर्फ चार को ही सफलता मिली है। यानि यहां का परीक्षाफल सबसे कम 26.66 फीसदी रहा है। संवाद