उत्तराखंड बोर्ड की मेरिट सूची में हालांकि इस बार जिले से ज्यादा विद्यार्थियों का नाम नहीं जुड़ पाया, लेकिन जितने भी विद्यार्थियों ने मेरिट में स्थान बनाया, वह सभी निजी स्कूलों के ही हैं। हाइस्कूल के पांच विद्यार्थियों ने मेरिट में स्थान प्राप्त किया और इंटर में सिर्फ एक विद्यार्थी मेरिट में शामिल हो पाया। निजी स्कूलों में शिक्षण की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर रहती है। उनमें सरकारी स्कूलों की तुलना में शिक्षकों को कम वेतन मिलता है, लेकिन प्रबंधमंडल पढ़ाई के साथ कभी समझौता नहीं करता। इस बार किसी भी सरकारी स्कूल के विद्यार्थी का नाम मेरिट सूची में नहीं आ पाया है।
हाइस्कूल की मेरिट में स्थान पाने वाले हिमालया इंटर कॉलेज चौकोड़ी के राजीव लोचन जोशी, अक्षय बोरा, विवेकानंद विद्या मंदिर पिथौरागढ़ के अतुल राय, ज्ञानदीप स्कूल कुमौड़ की पिंकी, साधना हाइस्कूल खितोली बेड़ीनाग के गौरव सिंह शामिल हैं। यह सभी विद्यालय निजी हैं। इंटर में जिस एकमात्र विद्यार्थी ने मेरिट में स्थान बनाया है, वह भी विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज धारचूला का है। इस विद्यालय के राहुल चंद को 25वीं रैंक मिली और राज्य की रैंक सूची में नाम शामिल हो गया।
पिछले कुछ समय से अभिभावकों का रुझान निजी स्कूलों की तरफ ज्यादा बढ़ा है। ग्रामीण अंचलों में सरकारी हाइस्कूल और इंटर कॉलेज होने के बावजूद लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में वरीयता देते आए हैं। इस तरह का रुझान सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती भी है। ताजा परिणामों ने शिक्षा व्यवस्था पर सुधार के लिए बड़े प्रयास के संकेत भी दिए हैं। निजी स्कूलों के लिए भी चुनौती है कि वह अगली बार की परीक्षा के समय और बेहतर प्रदर्शन कैसे करेंगे।