चंपावत। पहाड़ की लोक आस्था से जुड़े सातूं-आठूं पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्व की शुरुआत सोमवार को बिरुड़ पंचमी के साथ हुई। नगर के ज्ञालीसेरान और मल्ली मादली में महिलाओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर बिरुड़ भिगाए।
धार्मिक अनुष्ठान के तहत चना, गेहूं, गुरूस, मटर, कलों, राजमा और सोटी समेत सात प्रकार के अनाज भिगोकर मंदिर में रखे गए। स्थानीय जानकार उमा पांडेय ने बताया कि सप्त अनाज के साथ एक पोटली में गेहूं, सरसों, हल्दी, दूर्वाघास और हरा फल भी रखा गया।
बिरुड़ पंचमी के दिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और संतान के मंगल की कामना के लिए व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त को गौरा, महेश और गणेश की मूर्तियों का निर्माण किया जाएगा।
इस दौरान मनोरमा पांडेय, रेखा पांडेय, हिमानी पांडेय, नीलम पांडेय और निर्मला बोहरा समेत महिलाएं मौजूद रहीं। इधर, लोहाघाट ब्लॉक के सीमावर्ती गांवों सुनकुरी, लेटी, जमरसों, जाख-जिंडी, निडिल, लुपड़ा और नारसों में भी पर्व को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह है।