ऐतिहासिक जौलजीबी मेले की प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेले में विभिन्न विभागों के 30 सरकारी स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके अलावा बाहर से आने वाले व्यापारियों के लिए भी स्टॉल लगाए जाएंगे।
प्रतिवर्ष 14 नवंबर से जौलजीबी में काली और गोरी नदी के संगम पर व्यापारिक मेले का आयोजन किया जाता है। पूर्व में इस मेले में तिब्बत से भी लोग व्यापार के लिए आते थे। मेले में ऊनी कपड़ों के साथ ही थुलमा, चुटका, दन, कालीन, जैकेट, स्वेटर, विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटी, लोहे के बर्तन, रिंगाल से बने मोस्टे, डोके, डलिया आदि का खूब व्यापार होता है। नेपाल के मैदान में हुमली-जुमली के घोड़े भी काफी संख्या में बिकने के लिए आते हैं। पीलीभीत, बरेली आदि स्थानों के शौकीन इन घोड़ों की खरीदारी करते हैं।
मेले में धारचूला, बलुवाकोट, अस्कोट, तितरी, गर्खा, भागीचौरा, डीडीहाट, थल, मुनस्यारी, मदकोट के साथ ही अन्य स्थानों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मेलाधिकारी/एसडीएम धारचूला आरके पांडेय ने बताया कि स्टॉलों का आवंटन आठ नवंबर को सुबह 11 बजे से पटवारी चौकी जौलजीबी में किया जाएगा। व्यापारियों को पहचान पत्र लाना अनिवार्य है। निर्धारित शुल्क जमा कर स्टॉलों का आवंटन किया जाएगा। खंड विकास अधिकारी धारचूला ने बताया कि मेला स्थल पर मंच मरम्मत और रंगरोगन का कार्य किया जा रहा है।