थल के अस्याली गांव में ग्रामीणों द्वारा तैयार लकड़ी का पुल
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सौ साल से भी ज्यादा समय से अस्याली गांव के लोग रामगंगा से आवागमन के लिए लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने दिनरात मेहनत कर रामगंगा में 60 फुट लंबा लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर लिया है। इस पुल से ग्रामीणों का आवागमन शुरू हो गया है।
ग्रामीण हर साल अक्तूबर के पहले सप्ताह में पुल बनाते हैं। इस बार रामगंगा का जल स्तर बढ़ने से 24 दिन बाद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद एक सप्ताह में पुल को तैयार कर लिया है। वन पंचायत के कोष और श्रमदान से इस पुल का निर्माण किया गया है। प्रतिवर्ष बरसात में उफनाई रामगंगा से पुल बह जाता है। इससे चार माह तक आवागमन ठप हो जाता है। ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों को आवाजाही के लिए छह किमी की पैदल दौड़ खतरनाक रास्ते से लगानी पड़ती है। इस पुल पर अस्याली गांव ही नहीं, बल्कि सिनटोलिया, बलीगाड़, बलाऊं, ओखलिया, ग्वीरा, चिफलवा, कलान और कस्यारी के ग्रामीण आठ महीने तक आवागमन करते हैं।
सरकार ने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए वर्ष 2017 में झूलापुल की स्वीकृति दी। झूलापुल का निर्माण चल रहा है। अभी इसके बनने में तीन माह का समय और लगेगा। अस्याली गांव के वन पंचायत के कोष से 40 हजार रुपये की लागत से अस्थायी पुल का निर्माण किया गया है। अस्याली गांव के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश चंद रजवार के नेतृत्व में करण सिंह सामंत, गोपाल सिंह सामंत, दलीप चंद, जगदीश चंद, त्रिलोक चंद, जगत चंद, किशन चंद, राजेंद्र सामंत, गंभीर सिंह, गोविंद सिंह महरा, हेमंत भैसोड़ा, शंकर कुमार, सोनू कुमार आदि ने पुल बनाने में श्रमदान किया।