पिथौरागढ़। मुनस्यारी और कनालीछीना आदि स्थानों पर इस बार फरवरी से ही बुरांश खिल गया है, जबकि अमूमन बुरांश मार्च में खिलता है। लोग इस बदलाव को जलवायु परिवर्तन का सूचक मान रहे हैं।
हिमालय क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन का असर अब यहां की वनस्पति पर भी दिखाई देने लगा है। मुनस्यारी, पिथौरागढ़, कनालीछीना में बुरांश का फूल जलवायु परिवर्तन के चलते समय से पहले ही फरवरी में खिलना शुरू हो गया था। मौसम में हो रहे बदलावों का असर वनस्पति समेत जीव, जंतुओं पर भी पड़ रहा है।
मोनाल संस्था के सचिव सुरेंद्र पंवार ने बताया कि बुरांश अमूमन समुद्र तल से 1700 से 3400 मीटर की ऊंचाई पर होता है। यह मार्च-अप्रैल (चैत) में खिलता है। बुरांश को खिलने के लिए 15-21 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। इसमें करीब 15 से 20 दिन के अंदर फूल खिलने की प्रक्रिया पूरी होती है।
मुनस्यारी में मिलते हैं चार तरह के बुरांश
पिथौरागढ़। जिले में लाल, गुलाबी, बैंगनी सफेद और सफेद बुरांश मिलता है। मुनस्यारी में लाल और गुलाबी बुरांश के फूल खिल चुके हैं, जबकि बैंगनी सफेद और सफेद बुरांश अप्रैल में खिलता है। सफेद बुरांश सबसे अधिक ऊंचाई पर खिलता है। बैंगनी सफेद और सफेद बुरांश रातपा में खिलते हैं। इनकी लंबाई कम होती है।
हृदय रोग में लाभदायक है बुरांश
पिथौरागढ़। हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए लाल बुरांश के जूस बेहद लाभकारी माना जाता है। यह पुष्प तेज बुखार, गठिया, फेफड़े संबंधी रोगों में, इन्फलामेसन, उच्च रक्तचाप, हीमोग्लोबिन बढ़ाने, भूख बढ़ाने, आयरन की कमी दूर करने, हृदय और पाचन संबंधी रोगों में लाभदायक है। इसका आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक दवाइयों में भी प्रयोग होता है।