पिथौरागढ़। उत्तराखंड में पंचायत चुनाव खत्म हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और नवनिर्वाचित प्रधानों को निशाना बनाने का फर्जी खेल शुरू हो गया है। यूपी के इटावा से प्रकाशित एक तथाकथित पुस्तक पंजीकृत डाक से प्रधानों को भेजी जा रही है। दावा किया गया है कि इस पुस्तक में पंचायत चलाने के गुर, प्रधानों के अधिकार-कर्तव्य और ग्राम पंचायत के लिए करोड़ों रुपये लाने के तरीके बताए गए हैं। हकीकत यह है कि उत्तराखंड पंचायती राज विभाग ने ऐसी किसी पुस्तक को न तो प्रकाशित किया है और न ही इसकी जरूरत बताई है।
पिथौरागढ़ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में कई प्रधानों के पते पर इटावा में प्रकाशित पुस्तक भेजी गई है। इसे व्यक्तिगत पार्सल के रूप में भेजा जा रहा है। इसके लिए 450 रुपये कीमत और अलग से डाक शुल्क अदा करना पड़ता है। इतना ही नहीं पार्सल पर पोस्टमैन के नाम नोट लिखकर कहा जा रहा है कि प्रधान जी ने यह किताब ऑर्डर की है। इसे घर तक पहुंचाना जरूरी है। कई प्रधानों को अज्ञात नंबरों से फोन कर पुस्तक मंगवाने और ज़रूरी रूप से लेने का दबाव भी बनाया गया।
संवाद न्यूज एजेंसी ने इस पुस्तक की सत्यता जांचने के लिए पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से बात की। पंचायती राज विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रधानों के लिए किसी भी तरह की पुस्तक प्रकाशित नहीं की गई है। विभाग प्रधानों को प्रशिक्षण शिविरों के जरिए जानकारी देता है। अब इस फर्जीवाड़े के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही सभी एडीओ पंचायतों को निर्देश दिया गया है कि प्रधानों को जागरूक करें और इस पुस्तक को न लेने की अपील करें।
कई प्रधानों ने लौटाई, कुछ झांसे में आए
कुछ जागरूक प्रधानों ने किताब लेने से साफ इनकार कर दिया और पार्सल वापस कर दिया। जिले के कई प्रधान ठगों के झांसे में आकर इसे स्वीकार कर बैठे। विभाग का कहना है कि यह सिर्फ प्रधानों को गुमराह कर धन ऐंठने की साजिश है।
कोट
प्रधानों के लिए पंचायती राज विभाग ने किसी भी तरह की पुस्तक का प्रकाशन नहीं किया गया है। विभाग प्रधानों को जागरूक करने के लिए शिविर लगाता है। संबंधित पुस्तक फर्जी है, इसका उत्तराखंड के प्रधानों के लिए कोई उपयोग नहीं है। सभी एडीओ पंचायतों को पुस्तक न लेने के लिए प्रधानों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। - हरीश आर्या, जिला पंचायत राज अधिकारी, पिथौरागढ़